वर्ष 1975 में भारत के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ा, जिसे आज भी देश के सबसे विवादास्पद और चुनौतीपूर्ण निर्णयों में से एक माना जाता है। पच्चीस जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। इस निर्णय के साथ ही स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक लंबा अवरोध उत्पन्न हो गया था। इस अवधि के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया और नागरिक अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया। आपातकाल के उन दिनों ने देश की न्यायपालिका, प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया था।

आपातकाल लागू होने के इक्यावन वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को याद करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी व्यक्तियों को नमन किया है। अपने आधिकारिक वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन काले दिनों को कभी भुलाया नहीं जा सकता, जब देश पर आपातकाल थोपा गया था। उन्होंने उन सभी लोगों के त्याग और बलिदान को याद किया जिन्होंने उस कठिन समय में लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया और यातनाएं झेलीं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश उन लोगों के संघर्ष को हमेशा याद रखेगा।

केंद्र सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस अवसर पर आपातकाल के दौरान की स्थितियों का उल्लेख किया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने बताया कि उस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया और न्यायपालिका को कमजोर करने के प्रयास किए गए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी उस समय को भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन की एक गंभीर परीक्षा बताते हुए लोकतंत्र को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया।

ऐतिहासिक रूप से आपातकाल का निर्णय तत्कालीन कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत महंगा साबित हुआ था। हालांकि, जनता के सम्मिलित प्रयासों से आपातकाल को समाप्त किया गया और देश में लोकतंत्र की पुनः बहाली हुई। आज भी राजनीतिक गलियारों में उस दौर की चर्चा इस संदर्भ में होती है कि कैसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावित किया था। यह घटना आज भी भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और उसके सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए एक संदर्भ बिंदु के रूप में देखी जाती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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