देशभर में विजयदशमी का पर्व इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के पत्तों को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी के मौके पर कई स्थानों पर लोग एक दूसरे को शमी के पत्ते बांटते हैं और इन्हें सोने के समान माना जाता है। लोग इन पत्तों को देकर अपनी खुशहाली की कामना करते हैं।

दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा

ऐस्ट्रोलॉजर पिनाकी मिश्रा के अनुसार, विजयादशमी पर कई क्षेत्रों में शमी के पत्ते एक दूसरे को देकर शुभकामनाएं देने की परंपरा है। दशहरे के दिन शमी के पत्तों को प्रतीकात्मक रूप से सोना मानकर सुख-समृद्धि, उन्नति और सौभाग्य की कामना की जाती है।

शमी को क्यों माना जाता है सोने के समान?

शमी के पत्तों को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन पत्तों को सोने के समान देना धन-संपन्नता और मंगल कामना की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है। इस परंपरा का संबंध राजा रघु, ऋषि कौत्स और कुबेर से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोक प्रचलित कथा से है।

प्रचलित कथा के अनुसार, ऋषि कौत्स एक बार अपने गुरु को दक्षिणा देने के लिए राजा रघु के पास पहुंचे थे। राजा रघु ने उनकी सहायता करने का संकल्प लिया। राजा के खजाने में पर्याप्त सिक्के नहीं थे, लेकिन उन्होंने वचन दिया था। इसके बाद उन्होंने कुबेर से कहा कि आप स्वर्ण मुद्राओं की बरसात करो या युद्ध के लिए तैयार रहो।

इसके बाद कुबेर ने सोने के सिक्कों की बरसात शमी के पेड़ पर की। जिस दिन कुबेर ने सोने के सिक्कों की बरसात की थी, उस दिन विजयदशमी थी। इसलिए शमी को सोने के समान माना जाता है।

शमी के पत्तों की महाभारत काल से जुड़ी कथा

महाभारत से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने पर अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने अस्त्र-शस्त्र वापस लिए थे। इसलिए शमी के पेड़ को साहस, शक्ति, कर्तव्य और विजय का प्रतीक माना जाता है।

विजयादशमी पर शमी पूजन का महत्व

विजयादशमी का पर्व धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। शमी पूजन के माध्यम से साहस, सफलता, शुभता और कार्यों में उन्नति की कामना की जाती है। कई परिवारों में इस दिन शमी पत्र अर्पित करने, बड़ों का आशीर्वाद लेने और परिचितों को पत्ते बांटने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी पत्र को शुभता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। दशहरे के मौके पर शमी के पत्ते बांटना दूसरों के लिए उन्नति, सुख और मंगल कामना व्यक्त करने का माध्यम है। इसे धन प्राप्ति के बजाय धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।

महाराष्ट्र में आपटा के पत्ते बांटने का रिवाज

महाराष्ट्र में इस दिन आपटा के पत्ते बांटे जाते हैं। शमी और आपटा के पत्ते दोनों ही अलग-अलग हैं। क्षेत्रीय परंपराओं में दोनों को एक ही मानना उचित नहीं है। इसके साथ ही, शमी पूजन की परंपरा भी अनेक क्षेत्रों में प्रचलित है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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