अमृतसर में ड्रोन से ड्रग्स की तस्करी का भंडाफोड़! दुबई से संचालित सिंडिकेट से बरामद हुई 7.6 किलो हेरोइन - जानें कैसे हो रहा था स्मगलिंग
अमृतसर में भारत-पाक सीमा पर ड्रोन के जरिए भेजी गई 7.6 किलो हेरोइन जब्त। दो तस्कर गिरफ्तार, दुबई से बैठा मास्टरमाइंड वर्चुअल नंबरों से देता था निर्देश। पढ़ें पूरी खबर।

पंजाब के अमृतसर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े ‘ड्रोन-नार्को’ सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह मामला भारत-पाक सीमा से जुड़ा है, जहां ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भारत में गिराए जा रहे थे।
इस कार्रवाई में अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने 7.6 किलोग्राम हेरोइन के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह खेप पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से भारतीय सीमा में गिराई गई थी। यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है। जांच में पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा है।
कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए बड़ी मात्रा में हेरोइन गिराई गई है। इसके बाद तुरंत तलाशी अभियान चलाया गया।जांच के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ा गया। उनके पास से 7.6 किलो हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ में उन्होंने बताया कि यह खेप ड्रोन से गिराई गई थी और उन्हें निर्देश मोबाइल के जरिए मिले थे।
दुबई कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
जांच में सामने आया कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा एक हैंडलर है। वह ‘वर्चुअल नंबरों’ के जरिए तस्करों से संपर्क करता था।बताया जा रहा है कि यह हैंडलर पहले भी 43 किलो हेरोइन की तस्करी के मामले में वांछित है। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं। यह मामला दिखाता है कि ड्रग तस्करी अब केवल सीमा पार की समस्या नहीं रही, बल्कि इसका नेटवर्क कई देशों तक फैला हुआ है।
ड्रोन से बढ़ी तस्करी की चुनौती
भारत-पाक सीमा पर ड्रोन के जरिए तस्करी की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं। ड्रोन छोटे होते हैं, रात में उड़ते हैं और सीमा पार से आसानी से खेप गिरा देते हैं। इस तकनीकी तस्करी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सीमा पर तैनात BSF और पुलिस लगातार निगरानी बढ़ा रहे हैं।
ऑपरेशन प्रहार-2 और गैंगस्टरन ते वार
यह कार्रवाई पंजाब सरकार के ‘ऑपरेशन प्रहार-2’ और ‘गैंगस्टरन ते वार’ अभियान के तहत की गई है।
इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य है:
- सीमा पार से आने वाली तस्करी को रोकना
- ड्रग नेटवर्क को खत्म करना
- गैंगस्टर और तस्करों पर सख्त कार्रवाई करना
पंजाब सरकार का कहना है कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस और BSF की सराहना की है। कई लोगों ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों की मुस्तैदी से ही ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश हो पा रहा है। साथ ही, युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की मांग भी उठी है।
पंजाब में नशा: एक बड़ी चुनौती
पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। ड्रग्स की तस्करी से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। सरकार और पुलिस की कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि ऐसे नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए समाज, परिवार और शिक्षा संस्थानों को भी आगे आना होगा।
तकनीकी तस्करी पर सख्त प्रहार जरूरी
अमृतसर में 7.6 किलो हेरोइन की बरामदगी और ड्रोन-नार्को सिंडिकेट का खुलासा यह दिखाता है कि तस्करी के तरीके बदल रहे हैं। अब ड्रोन और वर्चुअल नंबरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलाए जा रहे हैं। दुबई से बैठे हैंडलर का नाम सामने आना इस मामले को और गंभीर बनाता है।पंजाब सरकार के ‘ऑपरेशन प्रहार-2’ और ‘गैंगस्टरन ते वार’ अभियान से यह संदेश गया है कि ड्रग माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत है कि सुरक्षा एजेंसियां तकनीक का बेहतर उपयोग करें और सीमा पर निगरानी और मजबूत हो।

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