वाशिंगटन डीसी। दुनिया की निगाहें एक बार फिर व्हाइट हाउस पर टिक गई हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व के सबसे भीषण संघर्षों में से एक के अंत की घोषणा कर सनसनी फैला दी है। बुधवार शाम जॉर्जिया में एक राजनीतिक कार्यक्रम और उसके बाद व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अपने अंतिम पड़ाव पर है। ट्रंप के शब्दों में "विजय" की स्पष्ट गूंज सुनाई दी, जब उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की रीढ़ तोड़ दी है और अब तेहरान किसी भी कीमत पर समझौता करने को बेताब है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध के मैदान की एक विनाशकारी तस्वीर पेश करते हुए दावा किया कि ईरान का सैन्य बुनियादी ढांचा अब लगभग अस्तित्वहीन हो चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कभी 159 जहाजों वाली एक शक्तिशाली नौसेना थी, लेकिन आज उसका हर एक जहाज समुद्र की तलहटी में टुकड़ों में बिखरा पड़ा है। इतना ही नहीं, उन्होंने ईरानी वायुसेना के पूरी तरह नष्ट होने का भी दावा किया। ट्रंप के अनुसार, ईरान की विमानरोधी प्रणालियां, रडार क्षमताएं और मिसाइल भंडार अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने एक बेहद कड़ा और विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि "ईरान के सभी प्रमुख नेता अब नहीं रहे," जिसका सीधा संकेत सैन्य अभियानों में हुई शीर्ष कमांडरों की क्षति की ओर था।

इस आक्रामक रुख के बीच ट्रंप ने कूटनीतिक रास्तों के खुलने का भी संकेत दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत में "अभूतपूर्व प्रगति" हुई है। ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध को खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक स्थायी प्रतिबंध लगाने की दिशा में काम करने की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने विश्वास जताया कि "ईरान समझौता करना चाहता है" और पिछले 24 घंटों में हुई बातचीत के आधार पर एक संभावित संधि बहुत जल्द हकीकत बन सकती है।

हालांकि, यह शांति की राह इतनी भी आसान नहीं दिख रही है। एक ओर जहां ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने "सच्चाई के साथ चेतावनी" (Truth Social) भी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अमेरिकी प्रस्ताव की शर्तों को नहीं मानता है, तो "बमबारी फिर से शुरू होगी," और इस बार उसकी तीव्रता पहले से कहीं अधिक और घातक होगी। ट्रंप ने कहा कि वह 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (Project Freedom) के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी ईरानी हस्तक्षेप का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।

ईरान की ओर से भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने पुष्टि की है कि तेहरान अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस कूटनीतिक खींचतान में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे अपनी राय और संशोधनों को पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से वाशिंगटन तक पहुंचाएंगे। हालांकि, ईरानी मीडिया ने ट्रंप के बयानों को "दुष्प्रचार" करार देते हुए कहा है कि अमेरिका अपने पीछे हटने के कदम को जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी कांग्रेस से भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 'वार पावर्स रेजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के तहत 60 दिनों की समय सीमा समाप्त हो रही है, जिससे राष्ट्रपति के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखने हेतु विधायी अनुमति अनिवार्य हो जाती है। ट्रंप ने इस कानून को "असंवैधानिक" बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यही दबाव उन्हें जल्द से जल्द समझौता करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम का वैश्विक प्रभाव गहरा है। ट्रंप की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह न केवल जो बाइडन प्रशासन की पुरानी नीतियों पर ट्रंप की बड़ी जीत होगी, बल्कि मध्य पूर्व में शांति का एक नया अध्याय भी लिखेगी। लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है— क्या यह वाकई युद्ध का अंत है या केवल एक और बड़ी तबाही से पहले की खामोशी? आने वाले कुछ घंटों में पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए मिलने वाला ईरान का जवाब इस सवाल का फैसला करेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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