महाविनाश के दहलीज से लौटी दुनिया; जाने कैसे हुआ 14 दिनों के ऐतिहासिक युद्धविराम का एलान ?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी को 14 दिनों के लिए टाला। पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुआ युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी नजर।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी को 14 दिनों के लिए टाला। पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुआ युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी नजर।
US Iran War Ceasefire 2026 : पश्चिम एशिया में छिड़े भीषण संघर्ष के बीच दुनिया ने तब राहत की सांस ली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विनाशकारी सैन्य कार्यवाही पर दो सप्ताह के लिए विराम लगाने की घोषणा की। 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि वह ईरान पर होने वाली बमबारी और हमलों को 14 दिनों के लिए निलंबित करने पर सहमत हो गए हैं। यह फैसला उस समय आया जब ट्रंप द्वारा दी गई 'अल्टीमेटम' की समय सीमा समाप्त होने में चंद घंटे ही शेष थे। इस समझौते के केंद्र में सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए सुरक्षित और तुरंत खोलने की शर्त रखी गई है। ट्रंप ने इसे 'दो-तरफा युद्धविराम' करार देते हुए कहा कि अमेरिका पहले ही अपने अधिकांश सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुका है और अब यह समय बातचीत के माध्यम से मध्य पूर्व में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने का है।
इस कूटनीतिक सफलता के पीछे पड़ोसी देश पाकिस्तान की बड़ी भूमिका उभरकर सामने आई है। युद्धविराम का यह आधिकारिक प्रस्ताव पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेश किया था। शरीफ ने न केवल ट्रंप से हमलों की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया, बल्कि ईरान से भी 'सद्भावना' के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जो भविष्य की वार्ता के लिए एक 'व्यावहारिक आधार' प्रदान करता है। हालांकि, इस शांति घोषणा से ठीक पहले ईरान को महाविनाश की चेतावनी दी गई थी, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान समझौता नहीं करता तो उसकी 'पूरी सभ्यता' और बुनियादी ढांचे को मिट्टी में मिला दिया जाता। हमलों की इसी कड़ी में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खारग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों और कई महत्वपूर्ण पुलों को निशाना भी बनाया था।
ईरानी पक्ष ने इस युद्धविराम का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही कड़े तेवर भी दिखाए हैं। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग तभी संभव होगा जब ईरान पर हमले पूरी तरह बंद रहेंगे। तेहरान ने जोर देकर कहा कि इस अस्थायी युद्धविराम का अर्थ युद्ध की समाप्ति कतई नहीं है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने 10 बिंदुओं की एक सूची जारी की है, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने, परमाणु अधिकारों की स्वीकृति, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी और युद्ध के हर्जाने जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। ईरान ने चेतावनी भी दी है कि यदि नागरिक ठिकानों को दोबारा निशाना बनाया गया, तो उसकी जवाबी कार्यवाही क्षेत्र की सीमाओं को पार कर जाएगी।
यह संघर्ष केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव इराक, लेबनान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक देखा गया। इराक के बसरा में रॉकेट हमले के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कुवैती वाणिज्य दूतावास पर धावा बोल दिया, जबकि दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों ने आठ लोगों की जान ले ली। संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोनों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इस भीषण रक्तपात और तबाही के बीच, 14 दिनों का यह युद्धविराम एक धुंधली उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। अब पूरी दुनिया की निगाहें पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ता पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या एक नए और अधिक भयावह संघर्ष की ओर।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
