वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच घरेलू रसोई गैस सिलिंडर के दाम 29 रुपये बढ़ाए गए, तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए लिया गया फैसला।

नई दिल्ली। देश की आम जनता पर महंगाई का बोझ एक बार फिर बढ़ गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों से पहले से ही परेशान आम उपभोक्ताओं को सरकार ने रसोई गैस के मोर्चे पर बड़ा झटका दिया है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलिंडर की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलिंडर अब 913 रुपये के बजाय 942 रुपये की बढ़ी हुई कीमत पर मिलेगा। पिछले तीन महीनों के भीतर घरेलू रसोई गैस की कीमतों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है, जिसने आम नागरिकों और गृहणियों के मासिक बजट को पूरी तरह से असंतुलित कर दिया है।

मूल्य संशोधन के इस ताजा फैसले के बाद देश के अलग-अलग महानगरों और प्रमुख शहरों में रसोई गैस की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। नए रेट कार्ड के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अब उपभोक्ताओं को एक सिलिंडर के लिए 968 रुपये चुकाने होंगे। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये तय की गई है, जबकि चेन्नई में यह दर 957.50 रुपये पर पहुंच गई है। दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के शहरों की बात करें तो गुरुग्राम में अब सिलिंडर 950.50 रुपये और नोएडा में 939.50 रुपये में उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त ओडिशा के भुवनेश्वर में दरें 968 रुपये, चंडीगढ़ में 951.50 रुपये, हैदराबाद में 994 रुपये, जयपुर में 945.50 रुपये और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 979.50 रुपये प्रति सिलिंडर हो गई हैं। देश में सबसे महंगा घरेलू सिलिंडर बिहार की राजधानी पटना में मिल रहा है, जहां इसकी नई कीमत 1031.50 रुपये हो गई है, जबकि केरल के तिरुवनंतपुरम में यह दर 951 रुपये निर्धारित की गई है।

पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, घरेलू स्तर पर कीमतों में की गई इस वृद्धि के पीछे मुख्य वजह वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल है। पश्चिम एशिया के क्षेत्र में लंबे समय से बने भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जहाजों के परिचालन में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने भी परिवहन लागत को काफी ऊंचा कर दिया है। इस वैश्विक संकट का सीधा असर भारत के घरेलू ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है, जिसके कारण कीमतों में संशोधन अपरिहार्य हो गया था।

आधिकारिक आंकड़ों और उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि सरकार द्वारा मार्च महीने में की गई 60 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी की बिक्री पर भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था। इस ताजा मूल्य संशोधन से ठीक पहले तक तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलिंडर की बिक्री पर लगभग 703 रुपये का घाटा हो रहा था। इस भारी-भरकम घाटे और बढ़ती इनपुट लागत के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन और तेल कंपनियों ने लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालना बेहद जरूरी समझा, जिसके परिणामस्वरूप कीमतों में यह वृद्धि की गई।

एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे नाजुक समय पर हुई है जब आम जनता पहले से ही अन्य ईंधनों की बढ़ती दरों से त्रस्त है। देश में मई महीने के मध्य से लेकर अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संचयी रूप से करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा दर्ज किया जा चुका है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की दरों में भी लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया मूल्य संशोधनों के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर वित्तीय दबाव बरकरार है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार कंपनियों को अब भी पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल की बिक्री पर 33.6 रुपये प्रति लीटर तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो आने वाले समय में ईंधन बाजारों में और अधिक अस्थिरता का संकेत दे रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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