आस्था, इतिहास और कानून-भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले से पहले धार की धड़कनें तेज, चप्पे-चप्पे पर पहरा|
इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच छह याचिकाओं पर निर्णय देगी; एएसआई की रिपोर्ट और लंबी बहस के बाद धार में सुरक्षा सख्त।

धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर का आंतरिक दृश्य, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट आज इस विवादित स्थल पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगा।
धार/इंदौर: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के भविष्य को लेकर आज एक अत्यंत निर्णायक दिन है। वर्षों से चले आ रहे इस विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ की डबल बेंच आज अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने जा रही है。 यह निर्णय उन छह प्रमुख याचिकाओं पर आधारित है, जिन पर लंबी कानूनी जिरह और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वैज्ञानिक सर्वे के बाद माननीय न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था。 सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रमुख वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा सोशल मीडिया पर इस तिथि की पुष्टि किए जाने के बाद से ही न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश की निगाहें इंदौर हाईकोर्ट के गलियारों पर टिकी हुई हैं。
भोजशाला का इतिहास और वर्तमान विवाद गहरी आस्थाओं और ऐतिहासिक दावों के बीच उलझा हुआ है। हिंदू पक्ष का अटूट विश्वास है कि यह परिसर राजा भोज द्वारा निर्मित मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर है, जिसे मुगल काल के दौरान मस्जिद में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया था。 इसके विपरीत, मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है और सदियों से वहां अपनी इबादत का दावा पेश करता रहा है。 इस गतिरोध को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने परिसर का व्यापक सर्वे किया था, ताकि वैज्ञानिक पद्धति से यह स्पष्ट हो सके कि इस विवादित संरचना की मूल प्रकृति क्या है。 लगभग 24 से 25 दिनों तक चली निरंतर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलों के समर्थन में ऐतिहासिक दस्तावेज, शिलालेख और एएसआई सर्वे के निष्कर्षों को प्रमुखता से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया है。
कानूनी पहलुओं की बात करें तो यह मामला अब अपनी परिणति की ओर बढ़ रहा है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें भूमिगत संरचनाओं और दीवारों पर मौजूद नक्काशी का विस्तृत विवरण दर्ज है। प्रशासन इस फैसले की संवेदनशीलता और इसके संभावित सामाजिक-राजनैतिक प्रभाव को लेकर पूरी तरह सजग है。 धार जिले और इंदौर हाईकोर्ट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य कर दिया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों को 'अलर्ट मोड' पर रखते हुए चप्पे-चप्पे पर भारी बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके。
यह फैसला केवल एक जमीन के टुकड़े का निर्णय नहीं होगा, बल्कि यह सदियों पुराने ऐतिहासिक सस्पेंस पर कानून की मुहर लगाएगा। जहाँ हिंदू संगठनों को उम्मीद है कि पुरातात्विक साक्ष्य उनके पक्ष में होंगे और मां वाग्देवी की पूजा का अधिकार बहाल होगा, वहीं मुस्लिम पक्ष भी अपनी कानूनी दलीलों पर भरोसा जता रहा है。 सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने शांति समितियों के साथ भी बैठकें की हैं। अब सबकी प्रतीक्षा उस पल पर केंद्रित है जब माननीय न्यायालय के शब्द इस लंबे विवाद का निपटारा करेंगे, जिसे भोजशाला के इतिहास में एक नया अध्याय माना जाएगा。

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
