हौसले ने रचा इतिहास ; शीतल बनी जीत की परिभाषा!
शीतल देवी ने अपनी जन्म से हुई बीमारी को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दी। हाथ विकसित न होनेके बावजूद पैरों से तीरंदाजी सीख, जीता विश्व ख़िताब।

ग्वांगजू: साउथ कोरिया में भारत ने अपना परचम लहराते हुए, एक बार फिर खुदको विश्व विजेता घोषित किया है। पैरा अर्चेरी में 18 साल की शीतल देवी ने अपना स्थान बनाया। शीतल को जन्म से फोकोमेलिया नाम की बीमारी है, और इसके कारण उनके हाथ कभी भी विकसित नहीं हो पाए।
शीतल देवी ने अपनी जीत की घोषणा करते हुए X (ट्विटर ) पर ये पोस्ट किया, कि "विश्व चैंपियन - ये खिताब अब हमारा है। पुरे दिल से, मेरे देश के लिए।"
World Champion - the world title is ours. With all my heart, for my country. ♥️🇮🇳🏹 pic.twitter.com/u8GNODNyzV
— SheetalArcher (@ArcherSheetal) September 27, 2025
शीतल की कहानी बहुत प्रेरित करने वाली है। इंडियन आर्मी के एक समारोह में उनकी कला को पहचाना गया था और तबसे उनकी ट्रेनिंग चालू थी। शीतल ने एक साल में ही एशियाई पैरा गेम्स में 2 गोल्ड मैडल जीते और 2024 में उन्हें ब्रोंज मैडल हासिल हुआ था।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
