बेंगलुरु मॉडल पर दिल्ली के 33 शामनाथ मार्ग बंगले को आपदा प्रबंधन केंद्र में बदला जा रहा है, जहां सभी सरकारी विभागों का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक निगरानी प्रणाली को अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गहन चर्चा का केंद्र रहा 33, शामनाथ मार्ग का प्रसिद्ध बंगला अब पूरी तरह से एक अत्याधुनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन केंद्र में तब्दील होने जा रहा है। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) ने इस रणनीतिक परिसर में एक अत्यंत हाईटेक 'इमरजेंसी ऑपरेशन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (ईओसीसी) स्थापित करने की व्यापक प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी है। इस महापरियोजना को दक्षिण भारत के तकनीकी केंद्र बेंगलुरु के बेहद सफल 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' के मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार इस परियोजना के माध्यम से प्रशासनिक तंत्र में एक युगांतरकारी बदलाव लाने का प्रयास कर रही है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में लिए जाने वाले निर्णयों की गति को कई गुना बढ़ाया जा सके।

इस पूरी परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इतिहास में पहली बार दिल्ली सरकार के तमाम महत्वपूर्ण विभागों और स्वायत्त एजेंसियों के डेटा को एक साझा प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने की दूरगामी योजना तैयार की गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम पहले ही बेंगलुरु के अत्याधुनिक कमांड कंट्रोल सेंटर का दौरा कर वहां की कार्यप्रणाली और तकनीकी बारीकियों का जमीनी स्तर पर अध्ययन कर चुकी है। इस दौरे से मिले इनपुट्स के आधार पर राजस्व विभाग के तत्वावधान में 33, शामनाथ मार्ग पर इस प्रस्तावित सेंटर का ढांचागत और तकनीकी डिजाइन तैयार करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। राजस्व विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि इस नवनिर्मित कमांड कंट्रोल सेंटर में स्थापित किए जाने वाले विशाल केंद्रीय स्क्रीन पर पूरी दिल्ली का रियल-टाइम डेटा एक ही डिजिटल डैशबोर्ड पर चौबीसों घंटे प्रदर्शित होगा, जिससे प्रशासनिक चौकसी और त्वरित निर्णय लेना संभव हो सकेगा।

इस महापरियोजना के तहत दिल्ली की तमाम महत्वपूर्ण सुरक्षा और नागरिक सेवा प्रदाता एजेंसियों के डेटा को पूरी तरह इंटीग्रेट किया जाएगा। सरकार द्वारा तैयार किए गए ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस नए सेंटर के भीतर दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली जल बोर्ड, सभी बिजली आपूर्ति कंपनियों (डिस्कॉम), मौसम विभाग और राजधानी भर में फैले व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इस एकीकरण का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह होगा कि यदि राजधानी के किसी भी हिस्से में आग लगने, गंभीर जलभराव, बड़े सड़क हादसे, या प्रदूषण के खतरनाक स्तर जैसी गंभीर आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, तो इसकी सूचना अलग-अलग विभागों के पास बिखरे हुए रूप में जाने के बजाय सीधे इस केंद्रीय कमांड सेंटर तक पहुंचेगी। सूचना मिलते ही सभी संबंधित विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करना और राहत कार्यों को गति देना बेहद आसान हो जाएगा।

इस हाईटेक केंद्र की स्थापना से दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे को बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है। सर्वप्रथम, इसके क्रियान्वयन से पूरी राजधानी की चौबीसों घंटे रियल-टाइम डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे अप्रत्याशित संकटों को उत्पन्न होने से पहले ही भांपना संभव होगा। इसके अतिरिक्त, किसी भी गंभीर आपदा या दुर्घटना के समय राहत और बचाव कार्य में जुटी विभिन्न एजेंसियों के बीच होने वाला पारंपरिक समन्वय अवरोध समाप्त हो जाएगा, जिससे घटना स्थल पर पहुंचने और कार्रवाई करने का रिस्पांस टाइम न्यूनतम स्तर पर आ जाएगा। यह सेंटर न केवल आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन और संपत्ति की रक्षा करेगा, बल्कि दिल्ली की पुरानी और जटिल शहरी समस्याओं जैसे कि मानसून के दौरान होने वाला जलभराव, भीषण ट्रैफिक जाम और कमजोर ड्रेनेज सिस्टम के स्थाई समाधान की दिशा में भी एक बेहतरीन मॉनिटरिंग टूल साबित होगा। बुनियादी ढांचे के विकास और जन सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह परियोजना दिल्ली के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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