नई दिल्ली स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर सोमवार को सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने जमा होकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। दरअसल, शाहदरा थाने में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद अधिकारियों के तबादले कर दिए गए थे। इसी फैसले से नाराज होकर पुलिसकर्मियों ने अपने मुख्यालय के बाहर नाराजगी जताई।

धारा 163 पर सोशल मीडिया पर चर्चा

प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों का कहना है कि जब नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू है, तो फिर पुलिसकर्मियों को इस तरह प्रदर्शन करने की अनुमति कैसे मिल गई?

आम तौर पर जब आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो उन्हें हिरासत में ले लिया जाता है और उन पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। ऐसे में लोगों ने पूछा कि क्या पुलिसकर्मियों के लिए नियम अलग हैं?

दोहरे रवैये पर लोगों और संगठनों के तंज

सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या पुलिस अब अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगी?

  • आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा ने सवाल उठाया कि पुलिस मुख्यालय उसी क्षेत्र में है जहां धारा 163 लागू है, तो क्या पुलिस अपने ही लोगों पर कार्रवाई करेगी?
  • सीजेपी (CJP) प्रवक्ता सौरभ दास ने इसे एक अभूतपूर्व दृश्य बताते हुए पूछा कि क्या इन पुलिसकर्मियों से भी शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाया जाएगा?

पूरे मामले ने कानून-व्यवस्था और नियमों की समानता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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