नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त अदालती परिसरों में से एक, पूर्वी दिल्ली स्थित कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर रविवार तड़के अचानक भीषण आग की लपटों से घिर गया। तड़के का समय होने और साप्ताहिक अवकाश के कारण अदालत परिसर के भीतर आम लोगों की आवाजाही नहीं थी, जिससे एक बहुत बड़ा और भयावह हादसा होने से टल गया। आग की लपटें कोर्ट परिसर की दूसरी मंजिल पर बने स्कैनिंग रूम से उठती हुई देखी गईं, जिसने देखते ही देखते कमरे के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के वक्त वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत मामले की जानकारी दमकल विभाग को दी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 5:22 बजे कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में आग लगने की आपातकालीन सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत हरकत में आई। आग की भयावहता और अदालत की संवेदनशीलता को देखते हुए शुरूआती दौर में ही दमकल की आठ गाड़ियों को दुर्घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। दमकलकर्मियों ने कड़े और जोखिम भरे प्रयासों के बाद लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग की लपटों पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया। गनीमत यह रही कि इस पूरे अग्निकांड में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या झुलसने की कोई खबर सामने नहीं आई है।

बचाव दल के अधिकारियों ने बताया कि आग की यह घटना कोर्ट की दूसरी मंजिल पर स्थित स्कैनिंग रूम के भीतर घटित हुई थी। इस अग्निकांड के कारण स्कैनिंग रूम के अंदर रखे कई कीमती लैपटॉप, कम्प्यूटर, डिजिटल उपकरण और अन्य जरूरी आधिकारिक सामान जलकर पूरी तरह से खाक हो गए हैं। इस घटना का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि जिस स्कैनिंग रूम में आग लगी थी, ठीक उसके बगल में ही अदालत का मुख्य रिकॉर्ड रूम स्थित था। यदि आग की लपटें रिकॉर्ड रूम तक पहुंच जातीं, तो दशकों पुराने कानूनी दस्तावेज और संवेदनशील मुकदमों की फाइलें नष्ट हो सकती थीं, जिससे न्यायिक प्रणाली को अपूरणीय क्षति पहुंचती। दमकलकर्मियों ने रणनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए आग को रिकॉर्ड रूम की तरफ बढ़ने से पहले ही रोक दिया।

शाहदरा बार एसोसिएशन के सचिव नरवीर डबास ने घटना के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रभावित स्कैनिंग रूम का उपयोग मुख्य रूप से अदालत के भौतिक रिकॉर्ड और पुरानी फाइलों को डिजिटल स्वरूप में बदलने यानी डिजिटाइजेशन प्रक्रिया के लिए किया जाता था। उन्होंने राहत जताते हुए कहा कि चूंकि रविवार को साप्ताहिक अवकाश था, इसलिए कोर्ट परिसर पूरी तरह खाली था और केवल सुरक्षा से जुड़े पुलिसकर्मी ही वहां तैनात थे। यदि यही घटना किसी आम कार्यदिवस के दौरान कामकाजी घंटों में होती, जब परिसर में हजारों की संख्या में वकील, वादी और न्यायिक कर्मचारी मौजूद रहते हैं, तो स्थिति बेहद गंभीर और अनियंत्रित हो सकती थी।

स्थानीय पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग ने मामले की आधिकारिक डायरी दर्ज कर ली है और दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाने के लिए प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। प्राथमिक तौर पर आग लगने की वजह का पूरी तरह से खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि स्कैनिंग रूम में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से यह हादसा हुआ होगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना संवेदनशील सरकारी और न्यायिक परिसरों में समय-समय पर फायर ऑडिट कराने और बिजली के लोड की जांच करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में इस तरह के प्रशासनिक और डिजिटल नुकसान को पूरी तरह से रोका जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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