जिंदपुर में गहरा गड्ढा बना बच्चों के लिए काल, बारिश के पानी में डूबने से दो की मौत, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल|
दिल्ली के जिंदपुर में खेतों में बने गहरे गड्ढे में डूबने से दो मासूम बच्चों की जान गई, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

दिल्ली के जिंदपुर में पुलिसकर्मी खेतों में बने उस गहरे गड्ढे का मुआयना कर रहे हैं, जहाँ दो बच्चों की डूबने से मौत हुई।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जिंदपुर इलाके में रविवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। खेतों के बीच खोदे गए गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने के कारण दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और बचाव दल तत्काल सक्रिय हुए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा लापरवाही और खुले गड्ढों के खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, जिंदपुर कॉलोनी के समीप खेतों में खुदाई के दौरान 8 से 10 फीट गहरे गड्ढे बनाए गए थे। हाल ही में हुई मानसूनी बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से लबालब भर गए थे। मृतक बच्चों की पहचान 8 वर्षीय आयुष और 9 वर्षीय नीतीश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे खेलते-खेलते अनजाने में इन गड्ढों के निकट पहुंच गए और संतुलन बिगड़ने के कारण गहरे पानी में जा गिरे। पानी अधिक गहरा होने और समय पर मदद न मिल पाने के कारण बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और आनन-फानन में बच्चों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फायर विभाग के अधिकारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले उन्हें मुखमेलपुर नहर में बच्चों के डूबने की सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर पहुंचकर जांच करने पर पता चला कि हादसा नहर में नहीं बल्कि खुले गड्ढों में हुआ है, जहाँ सेंट्रलाइज्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज (CATS) की टीम ने पहले ही पहुंच कर बच्चों को अस्पताल पहुँचा दिया था।
इस दुखद घटना के बाद जिंदपुर में मातम का माहौल है और पीड़ित परिवारों के प्रति हर कोई संवेदना व्यक्त कर रहा है। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। निवासियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की अनदेखी के चलते खेतों में खुलेआम गहरे गड्ढे छोड़े गए हैं, जो बारिश के मौसम में जानलेवा साबित हो रहे हैं। निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों से ऐसे असुरक्षित स्थानों की तुरंत घेराबंदी करने और भविष्य में किसी भी मासूम की जान बचाने के लिए ठोस सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की है। यह घटना न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि शहरी नियोजन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता को भी दर्शाती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

Lalita Rajput
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