ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आ रही धूल के कारण दिल्ली की हवा हुई खराब, अगले 7 दिनों तक बारिश की संभावना नहीं।

दिल्ली की आबोहवा में पिछले कुछ दिनों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI), जो कुछ दिन पहले महज 48 के स्तर पर था, अचानक उछलकर 294 तक पहुंच गया है। प्रदूषण के इस स्तर में वृद्धि ने विशेषज्ञों और आम जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर दिल्ली में प्रदूषण के कारणों की तलाश स्थानीय स्तर पर की जाती रही है, लेकिन इस बार के ताजा घटनाक्रम ने एक अलग ही सच्चाई सामने रखी है। इस प्रदूषण के लिए राजधानी के भीतर के कारक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आ रही धूल भरी हवाएं मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

मौसम विशेषज्ञों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आने वाली धूल भरी आंधी दिल्ली के वातावरण को प्रदूषित करने का काम कर रही है। ये हवाएं हजारों किलोमीटर का सफर तय करके भारत की राजधानी तक पहुंच रही हैं। भौगोलिक दूरी के लिहाज से देखें तो ईरान से दिल्ली की दूरी लगभग 2,555 किलोमीटर है, अफगानिस्तान से 1,005 किलोमीटर और पाकिस्तान से यह दूरी महज 450 किलोमीटर के करीब है। इन देशों के रेगिस्तानी और शुष्क इलाकों से उठने वाली धूल भरी आंधियां पश्चिमी हवाओं के प्रभाव के कारण भारत की ओर रुख करती हैं।

इन हवाओं के दिल्ली तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है। गर्म और शुष्क मौसम के कारण ये धूल भरी हवाएं तेजी से भारत की सीमाओं की ओर बढ़ती हैं। चूंकि ये धूल के कण वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं, इसलिए इन्हें लंबी दूरी तय करने में कोई बाधा नहीं आती है। ये पश्चिमी हवाओं के माध्यम से सबसे पहले भारत के सीमावर्ती राज्यों और उसके बाद पंजाब, हरियाणा और राजस्थान होते हुए दिल्ली तक पहुंच जाते हैं। जब ये हवाएं दिल्ली के ऊपर से गुजरती हैं, तो धूल के ये कण वायुमंडल में PM10 की मात्रा को अत्यधिक बढ़ा देते हैं।

जब इन धूल भरी हवाओं की गति धीमी हो जाती है, तो ये कण निचले वायुमंडल में फंस जाते हैं, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और हवा में धुंध छा जाती है। इसका सीधा असर जनजीवन पर पड़ता है, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होने लगता है। दिल्ली-एनसीआर के निमृत निवासियों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट और भी चिंताजनक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले सात दिनों तक दिल्ली में बारिश की कोई संभावना नहीं है। वर्तमान में तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश नहीं होती है, तो हवा की गुणवत्ता में सुधार के आसार बहुत कम हैं। धूल के कणों का यह अंतरराष्ट्रीय आवागमन दिल्ली के लिए एक बड़ी मौसमी चुनौती बनकर सामने आया है, जहां स्थानीय प्रयासों के साथ-साथ इन प्राकृतिक कारकों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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