भारत की 'शक्ति' का उद्घोष: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में दिखा सशक्त भारत का रोडमैप, वैश्विक अस्थिरता के बीच 'आत्मनिर्भरता' की नई ऊंचाई
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 विशेष रिपोर्ट: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद का खुलासा। वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत बना 'स्थिरता का केंद्र'। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश सर्वेक्षण में दिखा रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का असर। जानें कैसे बैंकिंग सुधार, बुनियादी ढांचे पर निवेश और आत्मनिर्भर भारत की नीतियों ने बदली देश की आर्थिक तस्वीर।

अडिग संकल्प और स्थायी विकास—प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर सवार हुआ नया भारत।
नई दिल्ली | 30 जनवरी 2026
जब विश्व की महाशक्तियाँ आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक संघर्षों के भंवर में फंसी हैं, तब भारत ने एक बार फिर अपनी संकल्पशक्ति से दुनिया को चौंका दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, महज़ एक सांख्यिकीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में उभरते 'विकसित भारत' का एक जीवंत प्रमाण है। यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि भारत की प्रगति की नींव अब इतनी गहरी हो चुकी है कि वह वैश्विक विपरीत परिस्थितियों (Global Headwinds) के बावजूद निरंतर आगे बढ़ने का सामर्थ्य रखती है।
सर्वेक्षण का सार: लचीलापन और स्थिरता (Resilience & Stability)
संसद के पटल पर रखे गए इस सर्वेक्षण का मुख्य स्वर 'स्थायित्व' है। जहाँ एक तरफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं चरमराई हुई हैं, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने आंतरिक सुधारों के दम पर अपनी रफ्तार बनाए रखी है। सर्वेक्षण में रेखांकित किया गया है कि भारत ने न केवल विकास दर को स्थिर रखा है, बल्कि राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) के साथ सामाजिक कल्याण के बीच एक दुर्लभ संतुलन भी स्थापित किया है।
आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख स्तंभ:
- मजबूत व्यापक आर्थिक आधार: मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और राजकोषीय घाटे को लक्षित दायरे में लाने में मिली सफलता ने निवेशकों के भरोसे को नई मजबूती दी है।
- पूंजीगत व्यय (Capex) पर जोर: बुनियादी ढांचे के निर्माण—सड़क, रेल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—पर सरकार के निरंतर निवेश ने निजी निवेश के लिए नए द्वार खोल दिए हैं।
- वित्तीय समावेशन: बैंकिंग क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधारों के कारण बैंकों के एनपीए (NPA) में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है।
- तकनीकी नेतृत्व: डिजिटल इंडिया और फिनटेक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को इस सर्वेक्षण में वैश्विक स्तर पर 'गेम-चेंजर' बताया गया है।
निर्णायक नेतृत्व और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन" (Reform, Perform, Transform) के मंत्र को इस सर्वेक्षण की सफलता का मूल आधार बताया गया है। सरकार द्वारा उठाए गए कड़े और दूरदर्शी फैसलों—जैसे कि जीएसटी (GST) का सरलीकरण, श्रम सुधार और पीएलआई (PLI) योजनाओं—ने भारत को दुनिया का 'मैन्युफैक्चरिंग हब' बनाने की दिशा में अग्रसर किया है। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की यह विकास यात्रा अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती ने इसे एक 'जन-आंदोलन' का रूप दे दिया है।
भविष्य की चुनौतियाँ और रणनीतिक तैयारी
यद्यपि सर्वेक्षण सकारात्मकता से भरपूर है, लेकिन इसमें भविष्य के जोखिमों को लेकर भी सतर्कता बरती गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित देशों की मौद्रिक नीतियों में बदलाव भारत के लिए चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। हालांकि, भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ता निर्यात आधार इन खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 इस बात की तस्दीक करता है कि भारत अब दुनिया की 'उम्मीद' बन चुका है। यह एक ऐसे भारत की तस्वीर पेश करता है जो न केवल अपनी चुनौतियों से लड़ना जानता है, बल्कि आपदा को अवसर में बदलने की कला में भी माहिर है। कल पेश होने वाला आम बजट इसी सर्वेक्षण की नींव पर खड़ा होगा, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक और बड़ा कदम होगा।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
