मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल से एक बेहद ही झकझोर देने वाली और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए ग्रामीण इलाके से आई एक असहाय माँ से अस्पताल के वार्ड के भीतर फर्श पर पोछा लगवाया गया और स्टूल साफ कराए गए। इस अमानवीय और चौंकाने वाले वाकया का वीडियो जैसे ही सामने आया, वैसे ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। एक तरफ जहाँ सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई के नाम पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए अस्पताल पहुँची उसकी माँ से इस तरह का काम कराया जाना व्यवस्था की पोल खोलता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल का है। वायरल वीडियो और सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तेजगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिमरिया गांव की रहने वाली एक महिला हल्की बहू से जुड़ी है। महिला अपने बेटे को दस्त की शिकायत होने पर उसके इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुँची थी। एक माँ के लिए उसका बीमार बच्चा उसकी दुनिया होता है, और वह अपने बच्चे की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार रहती है। इसी मजबूरी और उम्मीद के साथ वह अस्पताल पहुँची थी, जहाँ उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

वायरल वीडियो में महिला अस्पताल के फर्श पर साफ-सफाई करती हुई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। जब महिला से सफाई करने की वजह पूछी गई, तो उसने बताया कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उसे फर्श पर फैली गंदगी साफ करने के लिए कहा था। देर रात वार्ड के भीतर सफाई की यह जिम्मेदारी एक बीमार बच्चे की माँ पर डाल दी गई। अपने बच्चे के इलाज की खातिर उस माँ ने यह अपमानजनक और कठिन कार्य करना स्वीकार कर लिया। बेटे की खातिर उसने हर परेशानी को चुपचाप सहते हुए वह सब किया जो उससे कहा गया था। हालांकि, इस गंभीर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर अभी अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी आनी बाकी है।

इस घटना ने जिला अस्पताल के दावों और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, दमोह जिला अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था को संचालित करने की जिम्मेदारी एक आउटसोर्स एजेंसी के पास है। इस व्यवस्था के तहत अस्पताल में तीन सुपरवाइजर और 52 सफाईकर्मियों सहित कुल 55 कर्मचारियों की तैनाती बताई गई है। अस्पताल प्रबंधन के दावों के अनुसार, इस सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब 8 से 9 लाख रुपये की राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद, यदि अस्पताल के अंदर एक मरीज के परिजन से फर्श पर पोछा और स्टूल साफ कराए जाएं, तो यह लाखों रुपये के खर्च और प्रशासनिक निगरानी पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

सामने आए इस वीडियो के बाद से ही पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इस बात से बेहद हैरान हैं कि एक माँ के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। हालांकि, इस पूरे मामले के सामने आने के बाद भी फिलहाल जिला अस्पताल की तरफ से कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या जवाब सामने नहीं आया है। साथ ही, इस मामले में किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना भी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। एक माँ की लाचारी और व्यवस्था की यह तस्वीर मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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