चक्रवात 'अर्नब' के दौरान ओडिशा में 900 से ज्यादा बच्चों का जन्म, 'अर्नब', 'वर्षा' और 'तूफान' जैसे अनूठे रखे गए नाम|
ओडिशा में चक्रवात अर्नब के प्रभाव के दौरान 2245 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया था, जहां 900 से अधिक बच्चों का जन्म हुआ।

ओडिशा में चक्रवात अर्नब के प्रभाव के दौरान सुरक्षा और राहत के लिए बनाए गए आश्रय स्थल में रुके हुए लोग।
ओडिशा में चक्रवात 'अर्नब' के दौरान एक तरफ जहाँ मौसम की मार देखने को मिल रही थी, वहीं दूसरी तरफ कई परिवारों में नन्हे मेहमानों के आगमन से खुशियों का माहौल भी बना। चक्रवाती तूफान के इस चुनौतीपूर्ण समय के दौरान पूरे राज्य में 900 से ज्यादा बच्चों का जन्म हुआ। इन नवजात शिशुओं के जन्म को यादगार बनाने के लिए कई माता-पिता ने उनके नाम चक्रवात और मौसमी घटनाओं से जुड़े शब्दों पर रखे हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरी स्थिति पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि चक्रवाती तूफान 'अर्नब' ने राज्य के दक्षिणी हिस्सों को बुरी तरह से प्रभावित किया था। संभावित खतरे और आपदा को भांपते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था। चक्रवात के आने से ठीक पहले एहतियात के तौर पर राज्य भर से कुल 2245 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाया गया था। इन सभी महिलाओं में से 931 ने बच्चों को जन्म दिया, और राहत की बात यह है कि सभी माताएं और नवजात शिशु पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
जब चक्रवात 'अर्नब' इस क्षेत्र से गुजर रहा था, तो कुछ परिवारों ने अपने घर में जन्म लेने वाले बच्चों के नाम इस ऐतिहासिक मौसमी घटना से जुड़े शब्दों पर रखने का निर्णय लिया। परिजनों का मानना था कि इससे उनके बच्चों को जिंदगी भर यह विशेष पल याद रहेगा। इस दौरान नवजात लड़कों के नाम अर्नब, तूफान और पवन रखे गए, जबकि कुछ नवजात बच्चियों के नाम बर्षा और बतासी रखे गए हैं। ओडिशा के पात्रापुर स्थित बेंगाई साही की रहने वाली 30 वर्षीय सुकांती प्रधान ने पात्रापुर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया। सुकांती ने अपने इस बेटे का नाम 'अर्नब' रखा है। सुकांती के पति चक्रधर साबर ने बताया कि चक्रवात की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उन्हें पहले ही अस्पताल पहुँचा दिया था। वहाँ के मेडिकल ऑफिसर संबित बेगराय ने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया। जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाए गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
उसी स्वास्थ्य केंद्र में चिकराडा गाँव की रहने वाली 22 वर्षीय रुक्मिणी बेहरा ने बुधवार की सुबह 9:08 बजे एक बेटी को जन्म दिया। बेहरा परिवार ने घर में आई इस नन्ही परी का नाम 'बरसा रानी' रखा है। प्रसव के समय बाहर हो रही भारी बारिश और मौसम के मिजाज को देखते हुए वहाँ के मेडिकल स्टाफ ने ही 'बर्षा' नाम का सुझाव दिया था, जिसे परिवार ने खुशी-खुशी अपना लिया। उल्लेखनीय है कि रुक्मिणी बेहरा के पति, राम चंद्र वर्तमान में दुबई में एक मजदूर के तौर पर काम करते हैं। चक्रवात के इस संकटकाल के दौरान गंजम जिले में भी बड़ी संख्या में प्रसव मामले सामने आए। इस जिले से कुल 493 गर्भवती महिलाओं को नजदीकी अस्पतालों में सुरक्षित पहुँचाया गया था, ताकि खराब और खतरनाक मौसम के बीच भी उन्हें समय पर और उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य अधिकारी एस. कामेश्वर राव ने जानकारी दी कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक यहाँ 220 महिलाओं ने सफलतापूर्वक बच्चों को जन्म दिया। इन नवजात शिशुओं में 101 लड़के और 119 लड़कियां शामिल थीं।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात 'अर्णब' ने सुबह 2 बजे से 8 बजे के बीच ओडिशा के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के तट को पार किया था। इस चक्रवात का सीधा असर ओडिशा पर भी देखने को मिला, जिसकी वजह से राज्य के कई हिस्सों में भीषण बारिश दर्ज की गई। इस चक्रवात का नाम 'अर्नब' बांग्लादेश द्वारा रखा गया था। यह नाम संस्कृत भाषा के शब्द 'अर्णव' से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'महासागर' या 'विशाल जलराशि' होता है। यह नाम बंगाली भाषा में भी काफी प्रचलित है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के नाम तय करने की एक निश्चित प्रणाली है। इन तूफानों के नाम 'विश्व मौसम विज्ञान संगठन' और 'संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग' के 'उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल' द्वारा तय किए जाते हैं। नामकरण की इस विशेष प्रणाली की शुरुआत वर्ष 2004 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य एक ही समय में आने वाले अलग-अलग तूफानों के बीच स्पष्ट अंतर करना होता है, ताकि सरकारी अधिकारियों, मीडिया और आम जनता के लिए किसी भी आपदा की स्थिति में चक्रवात को पहचानना और उससे जुड़ी चेतावनियों को समझना आसान हो सके। इस प्रकार प्राकृतिक आपदा के बीच जन्मी इन नई जिंदगियों ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी और यह चक्रवात एक ऐतिहासिक घटना बन गया।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
