कच्चे तेल के बाजार में मची उथल-पुथल, ओपेक प्लस की अहम बैठक आज; यूएई की विदाई ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
यूएई के संगठन छोड़ने के बाद तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचीं, आपूर्ति बढ़ाने के लिए सात प्रमुख सदस्य देशों की महत्वपूर्ण चर्चा आज।

वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के अस्थिर होने और आपूर्ति संकट के बीच कच्चे तेल के ड्रमों की प्रतीकात्मक तस्वीर।
कच्चे तेल की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के ओपेक प्लस संगठन से आधिकारिक रूप से अलग होने के बाद आज इस संगठन के सात प्रभावशाली सदस्यों की पहली महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक के नतीजों पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर पड़ने वाला है। उल्लेखनीय है कि यूएई ने हाल ही में ओपेक छोड़ने की घोषणा की थी और 1 मई से वह अब इस समूह का सदस्य नहीं रह गया है।
यूएई के इस अप्रत्याशित फैसले और ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति अत्यधिक 'टाइट' हो गई है। आपूर्ति में कमी और कूटनीतिक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 126 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थीं। यूएई ओपेक प्लस का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश था, लेकिन उत्पादन कोटे को लेकर वह लंबे समय से संगठन से नाराज चल रहा था। यूएई ने अपने तेल बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया है और उसका लक्ष्य साल 2027 तक उत्पादन को बढ़ाकर 5 मिलियन बैरल रोजाना करने का है, जबकि ओपेक प्लस में उसका कोटा केवल 3.5 मिलियन बैरल के आसपास सीमित था।
आज होने वाली इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में अल्जीरिया, इराक, कजाकस्तान, कुवैत, ओमान, रूस और सऊदी अरब हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमतों में आए उछाल को नियंत्रित करने के लिए बैठक में कच्चे तेल के दैनिक उत्पादन में 188,000 बैरल की वृद्धि करने का निर्णय लिया जा सकता है। वर्तमान में ओपेक प्लस देशों का वास्तविक उत्पादन उनके मंथली कोटे से काफी कम है। मार्च के आंकड़ों के अनुसार, कुल उत्पादन गिरकर 27.68 मिलियन बैरल रह गया है, जबकि निर्धारित कोटा 36.73 मिलियन बैरल था। यानी कोटा और वास्तविक उत्पादन के बीच करीब 9 मिलियन बैरल का विशाल अंतर मौजूद है।
होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशों पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच यूएई का संगठन से बाहर होना संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है। कजाकस्तान और ईरान जैसे अन्य देश भी कथित तौर पर कोटे की पाबंदियों के कारण संगठन छोड़ने पर विचार कर सकते हैं। रूस, जो संगठन का दूसरा बड़ा उत्पादक है, वह भी यूक्रेन युद्ध की वजह से अपने कोटे के बराबर उत्पादन नहीं कर पा रहा है। अब दुनिया यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या ओपेक प्लस अपने कोटे में बदलाव कर बाजार के इस तूफान को शांत कर पाएगा या नहीं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
