दुबई/रियाद:

साल 2026 की शुरुआत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से खाड़ी के अरब देशों (GCC Countries) को अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक झटका लगा है। यह समुद्री रास्ता, जिसे दुनिया की 'तेल की जीवन रेखा' कहा जाता है, वर्तमान में एक युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो चुका है।

क्यों लगा अरब देशों को बड़ा झटका?

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर और इराक जैसे देश अपने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात के लिए पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, 4 मार्च 2026 को इस रास्ते के पूरी तरह बंद होने के बाद से इन देशों का समुद्री व्यापार ठप पड़ा है।

  • तेल उत्पादन में भारी गिरावट: मार्च के मध्य तक सऊदी अरब, कुवैत और यूएई के तेल उत्पादन में सामूहिक रूप से लगभग 10 मिलियन बैरल प्रति दिन की कमी दर्ज की गई है। निर्यात का रास्ता न मिलने के कारण कुओं से तेल निकालना कम करना पड़ा है।
  • खाद्य संकट (Grocery Emergency): अरब देश अपनी कैलोरी की जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा आयात करते हैं, जो इसी रास्ते से आता है। इस नाकाबंदी के कारण खाड़ी देशों में बुनियादी खाद्य वस्तुओं की कीमतें 40% से 120% तक बढ़ गई हैं।

आर्थिक मॉडल का चरमराना

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का आर्थिक मॉडल मुख्य रूप से ऊर्जा निर्यात पर टिका है। होर्मुज के बंद होने से कतर की 'कतर-एनर्जी' (QatarEnergy) को अपने सभी निर्यात पर 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) घोषित करना पड़ा है। इसका मतलब है कि वह अब अपने अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पूरा करने की स्थिति में नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के बाद दुनिया का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति व्यवधान है।

दुनिया पर असर: $120 के पार पहुँचा कच्चा तेल

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। इसका सीधा असर भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 75% तेल और 59% एलएनजी इसी क्षेत्र से मंगाते हैं।

क्या कोई वैकल्पिक रास्ता है?

सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ ऐसी पाइपलाइनें हैं जो होर्मुज को बाईपास कर लाल सागर या ओमान की खाड़ी तक जाती हैं। लेकिन ये पाइपलाइनें कुल निर्यात का केवल एक छोटा हिस्सा ही संभाल सकती हैं। इसके अलावा, ईरान समर्थित समूहों द्वारा सऊदी अरब के 'यनबू' (Yanbu) टर्मिनल और यूएई के 'फुजैराह' (Fujairah) पोर्ट पर किए गए हमलों ने इन वैकल्पिक रास्तों को भी असुरक्षित बना दिया है।

भारत का रुख और नाविकों की सुरक्षा

हाल ही में ब्रिटेन की अध्यक्षता में हुई एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत ने भी गहरी चिंता जताई है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसने इस संकट में अपने नाविकों को खोया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से होर्मुज को तुरंत खुलवाने की अपील की है ताकि वैश्विक व्यापार फिर से पटरी पर आ सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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