मद्रास HC व SC के झटके के बाद भी मुस्लिम आरक्षण के पक्ष में विजय सरकार , TVK दायर करेगी पुनर्विचार याचिका!
मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद तमिलनाडु की टीवीके सरकार ने धर्मांतरित मुस्लिमों के आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है।

तमिलनाडु में धर्मांतरित मुस्लिमों के आरक्षण के फैसले को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री थलपति विजय (प्रतिनिधात्मक फोटो)।
तमिलनाडु की सत्ता में बदलाव के बाद टीवीके (TVK) की सरकार ने पूर्ववर्ती डीएमके (DMK) सरकार के कई फैसलों को भले ही बदल दिया हो, लेकिन हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम या अन्य धर्म अपनाने वाले लोगों को आरक्षण देने के मुद्दे पर वह पुरानी सरकार के रुख के साथ ही खड़ी दिख रही है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया कि तमिलनाडु सरकार इस आरक्षण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।
क्या है पूरा मामला और सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
हाल ही में 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी थी। सर्वोच्च अदालत ने डीएमके शासनकाल के उस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदू धर्म से इस्लाम या अन्य धर्म अपनाने वाले अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 16(4) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का पालन करने वालों को ही मिल सकता है। अदालत ने टिप्पणी की कि पुरानी सामाजिक व्यवस्था में झेला गया पिछड़ापन अपने आप नए धर्म में स्थानांतरित नहीं हो जाता और नए धर्म को अपनाने के बाद अनुच्छेद 16(4) के तहत विशेष लाभ या आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता। इस फैसले में धर्मांतरण के साथ ही हिंदू धर्म की जातीय पहचान को समाप्त माना गया।
DMK सरकार ने दिया था 3.5% मुस्लिम आरक्षण
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले, 9 मार्च 2024 को तत्कालीन एम. के. स्टालिन नीत डीएमके सरकार ने एक आदेश जारी किया था। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने वाले ओबीसी और अनुसूचित जाति के लोगों को 3.5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।
इस व्यवस्था के तहत धर्मांतरित मुसलमानों को 'पिछड़ा वर्ग मुस्लिम' का दर्जा दिया गया और इसके भीतर सात मुस्लिम जातियों की पहचान की गई थी। तब स्टालिन सरकार का तर्क था कि पिछड़ापन सदियों पुरानी जाति प्रथा और सामाजिक परंपराओं का नतीजा है, इसलिए अगर कोई हिंदू धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाता है तो उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति तुरंत नहीं बदल जाती।
मद्रास हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था सरकारी आदेश
डीएमके सरकार के इस फैसले से राज्य की राजनीति में काफी हलचल मची थी और इस आदेश को कानूनी चुनौती दी गई थी। इसके बाद 25 जून 2026 को मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और पी. बी. बालाजी की खंडपीठ ने इस सरकारी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।
हाई कोर्ट का फैसला आने तक राज्य में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी थी। तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन हुआ और टीवीके (TVK) ने कांग्रेस और वामपंथी (Left) दलों के समर्थन से सरकार बनाई, जबकि डीएमके विपक्ष में आ गई। मुख्यमंत्री बनने के बाद थलपति विजय ने पिछली सरकार के कई फैसलों को रद्द कर दिया, पर धर्मांतरित मुस्लिमों को आरक्षण देने के इस मुद्दे पर उन्होंने डीएमके के रुख का समर्थन जारी रखा।
राजनीतिक आंकड़े और मुस्लिम-ईसाई वोट बैंक का गणित
आरक्षण के इस फैसले को थलपति विजय की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। तमिलनाडु में ईसाई और मुस्लिम मतदाताओं की कुल हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है, जो परंपरागत रूप से डीएमके का कोर वोट बैंक माने जाते हैं।
चुनाव आंकड़ों के अनुसार:
- पिछले चुनावों में डीएमके को लगभग 64% मुस्लिम और 53% ईसाई वोट मिले थे।
- विधानसभा चुनाव में डीएमके को करीब 29% वोट मिले थे, जबकि हालिया उप-चुनावों में पार्टी ने 31% वोट हासिल किए।
उप-चुनावों में हार के बावजूद डीएमके का यह परंपरागत वोट आधार कम नहीं हुआ। थलपति विजय ने कई लोकलुभावन योजनाओं के जरिए अन्य वोटरों में अपनी पैठ तो बना ली है, लेकिन वे 2026 के चुनावों में डीएमके के इस मजबूत वोट बैंक को तोड़ नहीं पाए थे। सत्ता में आने के बाद अब विजय सरकार पुनर्विचार याचिका के जरिए इस वर्ग में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
