Constitution Day 2025 : संविधान दिवस के अवसर पर पुरी समुद्र तट पर आज एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पद्म श्री से सम्मानित सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने छह टन रेत का उपयोग कर लगभग छह फीट ऊंची भव्य सैंड स्कल्पचर तैयार की, जिसमें भारतीय संविधान की महिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक दिखाई दे रही थी। स्कल्पचर पर बड़े अक्षरों में 'हैप्पी कॉन्स्टिट्यूशन डे' लिखा गया था, जो दूर से भी स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

इस कला परियोजना में सुदर्शन पटनायक को उनके सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों का सहयोग मिला। टीम ने मिलकर इसे सीमित समय में तैयार किया, और जैसे ही यह इंस्टॉलेशन जनता के सामने आया, लोग तस्वीरें लेने और वीडियो बनाने में व्यस्त हो गए। स्कल्पचर न केवल एक कलात्मक निर्माण था, बल्कि यह नागरिकों को यह स्मरण कराने का भी एक प्रयास था कि संविधान ही देश के लोकतंत्र की असली ताकत है और इसे सुदृढ़ बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

सुदर्शन पटनायक ने कहा कि इस सैंड आर्ट के माध्यम से वे संविधान दिवस के महत्व को सामने लाना चाहते थे। उन्होंने सभी नागरिकों को इस पावन अवसर की शुभकामनाएं दी और बताया कि इस प्रकार की कलाकृतियां न केवल सौंदर्य और कौशल का प्रदर्शन हैं, बल्कि लोगों में जागरूकता और राष्ट्रीय गर्व की भावना भी जगाती हैं।

संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान को अपनाया गया था। देशभर में इस दिन को विभिन्न कार्यक्रमों, शैक्षिक गतिविधियों और जनजागरण के माध्यम से बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह दिवस नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का अवसर भी प्रदान करता है।

पुरी की यह रेत की मूर्ति न केवल सुदर्शन पटनायक की कला का प्रतीक बनी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रति सम्मान और गर्व का भी संदेश देती है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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