Congress TVK alliance Tamil Nadu news : दक्षिण भारत की राजनीति के गढ़ तमिलनाडु में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने दशकों से चले आ रहे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। अभिनेता से जननायक बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) की ऐतिहासिक जीत ने न केवल राज्य की सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा की है, बल्कि एक अभूतपूर्व सियासी उलटफेर की पटकथा भी लिख दी है। नई सरकार के गठन की गहमागहमी के बीच सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) के साथ अपना वर्षों पुराना गठबंधन तोड़ने का साहसिक निर्णय लिया। कांग्रेस ने अब थलपति विजय की पार्टी को अपना पूर्ण समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिससे राज्य में 'स्टालिन बनाम अन्य' की जगह अब एक नई त्रिकोणीय और चुनौतीपूर्ण राजनीति ने जन्म ले लिया है।

इस रणनीतिक परिवर्तन की औपचारिक पुष्टि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडणकर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की गई। चोडणकर ने खुलासा किया कि टीवीके अध्यक्ष विजय ने स्वयं कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क कर सरकार गठन के लिए औपचारिक समर्थन मांगा था। कांग्रेस के शीर्ष कमान और तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के बीच गहन मंथन के बाद यह निर्णय लिया गया कि राज्य की जनता, विशेषकर युवाओं के जनादेश का सम्मान किया जाना अनिवार्य है। कांग्रेस के अनुसार, यह जनादेश एक धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और जनकल्याणकारी सरकार के लिए है, और टीवीके के साथ जुड़ना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, इस समर्थन के साथ कांग्रेस ने एक कड़ा संवैधानिक सुरक्षा घेरा भी लगाया है। पार्टी ने स्पष्ट शर्त रखी है कि इस गठबंधन में किसी भी ऐसी 'सांप्रदायिक ताकत' को जगह नहीं दी जाएगी, जो भारत के संविधान और उसकी मूल संरचना में विश्वास नहीं रखती हो।

यह गठबंधन केवल तात्कालिक सत्ता सुख या सरकार गठन तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसकी गहराई भविष्य के कई चुनावों तक जाती है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि टीवीके के साथ उनका यह गठबंधन आगामी स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी निरंतर जारी रहेगा। दोनों दलों ने पेरुंथलाइवर कामराज, पेरियार और डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपनी वैचारिक आधारशिला बनाने का संकल्प लिया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को लागू करना और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना होगा।

तमिलनाडु की धरती पर हुए इस बड़े राजनीतिक परिवर्तन ने केंद्र की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या केंद्र में 'इंडिया ब्लॉक' के भीतर कांग्रेस और डीएमके के संबंध पहले की तरह बने रहेंगे या तमिलनाडु की यह आग दिल्ली के दरबार तक पहुंचेगी। अभी तक इस मुद्दे पर दोनों तरफ से चुप्पी साधी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का यह दांव तमिलनाडु में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध करने की एक सोची-समझी रणनीति है। इस फैसले के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति अब द्रविड़ विचारधारा के पारंपरिक द्वंद्व से निकलकर एक नए और अनिश्चित भविष्य की ओर कदम बढ़ा चुकी है, जिसका प्रभाव आने वाले दशकों तक दक्षिण भारत की राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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