पांच साल की उम्र में पोलियो से जंग जीतने वाले झंडू ने राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगा लहराकर रच दिया नया इतिहास|
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा पावरलिफ्टिंग के हैवीवेट वर्ग में झंडू कुमार ने भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार स्कॉटलैंड के ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद खुशी मनाते हुए।
कभी सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करने वाले बिहार के लाल झंडू कुमार ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है। नालंदा जिले के हरनौत के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक का खाता खोला। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद से न सिर्फ उनके पैतृक गांव हरनौत बल्कि पूरे देश में जश्न और गर्व का माहौल बना हुआ है।
महज पाँच वर्ष की कम उम्र में पोलियो की चपेट में आने के कारण दिव्यांगता का सामना करने वाले झंडू कुमार का जीवन संघर्षों की एक लंबी दास्तान रहा है। आर्थिक तंगी और लोगों के ताने सुनने के बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसला को टूटने नहीं दिया। उनके माता-पिता आज भी हरनौत बाजार में एनएच-20 के किनारे रेहड़ी पर आलू-प्याज बेचकर अपना जीवनयापन करते हैं। चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे झंडू ने अपने शुरुआती दिनों में पिता की सब्जी की दुकान पर हाथ बंटाते हुए खेल के प्रति अपने समर्पण को बनाए रखा। विकलांगता के कारण लोग उन्हें बचपन में 'झंडू' पुकारने लगे, जो बाद में उनकी पहचान बन गई।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शुक्रवार देर रात हुए पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग मुकाबले में झंडू कुमार ने ग्रुप-बी से खेलते हुए अपने मजबूत इरादों का परिचय दिया। उन्होंने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 130.9 अंक हासिल किए और तीसरा स्थान पक्का किया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाकर बर्मिंघम 2022 का गेम्स रिकॉर्ड तोड़ने का प्रयास भी किया, हालांकि वे इसमें सफल नहीं हो सके। प्रतियोगिता में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक हासिल किया। मैच के बाद अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए झंडू ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि मानो वे हवा में उड़ रहे हैं क्योंकि यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका पहला पदक है।
झंडू की इस कामयाबी की गूंज देश के सर्वोच्च स्तर तक सुनाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर झंडू कुमार के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। प्रधानमंत्री ने लिखा कि झंडू कुमार का यह शानदार प्रदर्शन उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। हर चुनौती का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा प्रदर्शन कर उन्होंने देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि मुकाबले से ठीक पहले झंडू ने अपनी माँ से फोन पर आशीर्वाद लिया था और पदक जीतकर लौटने का वादा किया था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ निभाया।
मूल रूप से सबनहुआ-डीह के रहने वाले और वर्तमान में हरनौत में किराए के मकान में रहने वाले झंडू कुमार की यह सफलता उनके लंबे संघर्ष का सुखद परिणाम है। हालांकि वे स्वर्ण पदक से मामूली तकनीकी चूक और जल्दबाजी में सांस लेने के कारण चूक गए, लेकिन उनका यह कांस्य पदक देश के लिए किसी ऐतिहासिक स्वर्ण से कम नहीं है। अपनी इस उपलब्धि को जीवन की महज एक शुरुआत बताते हुए झंडू ने स्पष्ट किया है कि उनका अगला लक्ष्य आगामी पैरा एशियाई खेलों और पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतना है, साथ ही वे 232 किलोग्राम के विश्व रिकॉर्ड को भी तोड़ना चाहते हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा साबित करती है कि यदि इरादे फौलादी हों तो हर बाधा को पार किया जा सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
