ED को लेकर CJI का रहस्यमयी बयान, बिच में ही रोक लिए शब्द
सीजेआई बी आर गवई ने ईडी पर सवाल उठाते हुए कहा कि TASMAC घोटाले की जांच राज्य पुलिस कर सकती थी, तो ईडी ने दखल क्यों दिया। उन्होंने इसे राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया।

तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन ( TASMAC ) से जुड़े 1000 करोड़ रुपयों के घोटाले मामले के तहत सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय ( ED ) को फटकार लगाई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई (CJI Gavai ) ने कहा की वे ED के जाँच पर कुछ कहना नहीं चाहते। वरना इसे भी सोशल मिडिया में फैलने के लिए ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। यह चर्चा का विषय बन सकता है। तो चलिए जानते है इस मामले के बारे में विस्तार से।
14 अक्टूबर के दिन CJI Gawai और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच मामले पर सुनवाई चल रही थी। ED ने मार्च में TASMAC के चेन्नई मुख्यालय में 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए छापेमारी की थी। यह छापेमारी शराब की कीमत बढ़ाने, टेंडर में हेराफेरी और रिश्वतखोरी से जुड़ी थी। उस दौरान एजेंसी ने TASMAC के कंप्यूटर और अन्य जरूरी सामान जब्त किए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या यह काम राज्य पुलिस नहीं कर सकती थी और ईडी का दखल क्यों जरूरी था। यानी कोर्ट ने यह देखने की कोशिश की कि केंद्रीय एजेंसी ने राज्य के अधिकारों में दखल अंदाजी की थी या नहीं।
कोर्ट ने ईडी से सवाल किया कि क्या उसने राज्य पुलिस के अधिकारों में दखल तो नहीं किया। कोर्ट ने पूछा कि अगर राज्य पुलिस इस घोटाले की जांच कर सकती थी, तो ईडी का हस्तक्षेप क्यों जरूरी था और इससे संघीय ढांचे पर क्या असर पड़ेगा। CJI गवई ने कहा कि उन्होंने पिछले छह सालों में कई ईडी जांच देखी हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा से बचने के लिए अब कुछ नहीं कहना चाहते।
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सोशल मीडिया पर ईडी के पक्ष में कम ही बात होती है और यही उनकी शिकायत है। सुनवाई के दौरान TASMAC की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्था पर छापेमारी कैसे हो सकती है, जबकि कार्रवाई का आदेश खुद TASMAC ने ही दिया था।
कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि मैनेजिंग डायरेक्टर्स के यहां छापेमारी हुई, FIR दर्ज हुई और कई मामलों में ESIR भी हो गई। उन्होंने कहा कि ज्यादातर FIR पहले ही बंद हो चुकी थीं और अगर ED के पास कुछ जरूरी जानकारी थी, तो इसे स्थानीय पुलिस के साथ साझा किया जाना चाहिए था।
SSG राजू ने जवाब में कहा कि TASMAC पर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी हो रही थी और 47 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इस पर सीजेआई गवई ने कहा कि ईडी की यह कार्रवाई क्या राज्य के अधिकारों में अतिक्रमण नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि यह देखना जरूरी है कि केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप राज्य पुलिस के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
