क्या अब UAPA केस में मिलेगा जल्द इंसाफ? CJI सूर्यकांत का यूएपीए मामलों को लेकर बड़ा रोडमैप।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने UAPA मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन और लंबित मामलों के समाधान पर बल दिया है।

CJI सूर्यकांत और उमर खालिद, जिनका UAPA मामला हाल ही में सुनवाई में देरी को लेकर चर्चा में रहा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत चल रहे मुकदमों में हो रही देरी को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन गंभीर मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाना आवश्यक है, ताकि लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद जमानत न मिल पाने से जुड़ी शिकायतों का निवारण हो सके। हालांकि उन्होंने किसी विशेष आरोपी या मामले का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह वक्तव्य उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे उन चर्चित मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें आरोपी वर्षों से अंडर-ट्रायल के तौर पर जेल में बंद हैं।
मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, इस समस्या का एक समाधान समानांतर न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से पहले ही निकाला जा चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि वे केंद्र सरकार को UAPA, PMLA और NDPS जैसे संवेदनशील कानूनों से संबंधित मुकदमों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए मनाने में सफल रहे हैं। इन विशेष अदालतों का कार्य शुरू हो चुका है और यदि इन मामलों में एक वर्ष के भीतर या उससे भी अधिक तेजी से सुनवाई पूरी की जा सके, तो यह न्याय व्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न केवल मुकदमों का निपटारा होगा, बल्कि आरोपियों की लंबित मामलों से जुड़ी चिंताएं भी दूर होंगी।
न्यायपालिका के समक्ष मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि निचली अदालतों में लंबित पांच करोड़ से अधिक मामले सबसे बड़ी चुनौती हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा आपराधिक मुकदमों का है। दूसरी बड़ी चुनौती आम नागरिक और सर्वोच्च न्यायालय के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि आम आदमी के मन में सर्वोच्च न्यायालय की छवि कई बार भय पैदा करती है, क्योंकि उसे डर रहता है कि उसका मामला सालों तक लंबित रह सकता है या वह कानूनी खर्च उठाने में असमर्थ हो सकता है। इसे बदलने के लिए बार एसोसिएशन को पीठ के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया है।
इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश ने अर्ध-न्यायिक निकायों और ट्रिब्यूनल्स की विश्वसनीयता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि NCLT, NCLAT और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसे निकायों की छवि को सुधारना एक आवश्यक कदम है। अक्सर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा संचालित इन संस्थाओं में सेवा की बदलती शर्तों के कारण नेतृत्व की कमी देखी जा रही है। उन्होंने अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से अपील की कि वे देश और समाज की सेवा के उद्देश्य से इन ट्रिब्यूनल्स में जिम्मेदारी संभालें। न्यायालय का यह रुख न केवल लंबित मुकदमों के त्वरित निपटान की ओर एक कदम है, बल्कि यह न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास और पारदर्शिता बहाल करने का एक व्यापक प्रयास भी है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
