हरियाणा के नूंह जिले के तावडू क्षेत्र में एक सर्कस के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां खोरी गांव में लगे एक ट्रैवलिंग बाइसिकल सर्कस के फिनाले में 27 वर्षीय कलाकार दीपक ने लाइव समाधि लेने का खतरनाक स्टंट किया, जिसके दौरान दम घुटने से उनकी मौत हो गई। मूल रूप से फरीदाबाद के गौंची गांव के रहने वाले दीपक इस सर्कस के आयोजकों में से एक थे।

घटना वाले दिन सर्कस में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए दीपक ने कई साहसी साइकिलिंग स्टंट दिखाए, जैसे हैंडलबार पर संतुलन बनाना, बिना पहियों को देखे साइकिल चलाना और चलती साइकिल पर सीधे खड़े होना। इन करतबों के बाद उनका मुख्य आकर्षण लाइव समाधि का स्टंट था, जो उत्तर भारत के ग्रामीण मेलों में काफी प्रसिद्ध माना जाता है। योजना के अनुसार दीपक एक बोरी के अंदर गए, खुद को एक विशेष रूप से खोदे गए गड्ढे में उतारा और ऊपर से मिट्टी डाल दी गई।

पुलिस का मानना है कि दीपक गुरुवार को गड्ढे में गए थे, हालांकि समय को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस बात की जांच की जा रही है कि वह असल में कितनी देर तक जमीन के नीचे रहे और क्या यह एक्ट निर्धारित समय सीमा से अधिक खिंच गया था। जब स्टंट ग्रुप के अन्य सदस्यों ने फिनाले के दौरान उन्हें बाहर निकालने के लिए जमीन खोदी, तब जाकर उनकी मौत का पता चला।

विशेषज्ञों और जानकारों के अनुसार, जमीन के नीचे जीवित रहने के लिए वर्षों के कड़े अभ्यास, सांस पर असाधारण नियंत्रण और बेहद सावधानीपूर्वक तैयारी की आवश्यकता होती है। बोरी में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं और मिट्टी के बीच हवा के आने-जाने के लिए पतले रास्ते बनाए जाते हैं। हालांकि, ऐसे स्टंट में कलाकार आमतौर पर कुछ घंटों या अधिकतम एक दिन के लिए ही दफन रहते हैं, क्योंकि समय बीतने के साथ जोखिम तेजी से बढ़ता जाता है। इस अत्यधिक जोखिम भरे प्रदर्शन के अंत में ग्रुप को दर्शकों से बमुश्किल 1,500 से 2,000 रुपये ही मिलते थे।

गुरुग्राम के सीके बिड़ला अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. तुषार तयाल ने बताया कि इतनी सावधानियों के बावजूद ऐसे स्टंट चिकित्सीय रूप से बेहद खतरनाक होते हैं। जमीन के नीचे बंद जगह में जीवित रहना ऑक्सीजन की उपलब्धता, वेंटिलेशन, तापमान और नमी पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे ऑक्सीजन का स्तर घटता है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, व्यक्ति को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है, वह भ्रम की स्थिति में आ सकता है और बेहोश हो सकता है। ध्यान या श्वास नियंत्रण की तकनीकें कुछ पल के लिए मदद कर सकती हैं, लेकिन वे शरीर की ऑक्सीजन की मूल जरूरत को समाप्त नहीं कर सकतीं। ऐसे स्टंटों में दम घुटने से मौत का बड़ा खतरा होता है।

दीपक के बड़े भाई सुनेत दाव ने बताया कि उन्होंने खुद कुछ साल पहले ऐसे ही करतब करना छोड़ दिया था। उनका परिवार इस काम के पूरी तरह खिलाफ था। उनके भाई लगभग 10 साल से यह करतब कर रहे थे, जबकि उन्होंने खुद करीब 15 साल तक यह काम किया था। उनका कहना था कि आमतौर पर वे कभी भी 24 घंटे से ज्यादा जमीन के अंदर नहीं रहते थे, क्योंकि उससे अधिक समय बेहद खतरनाक हो जाता है।

पुलिस के अनुसार, यह ग्रुप खानाबदोश 'नट' समुदाय का था, जिसके सदस्य आजीविका के लिए कलाबाजी और सर्कस पर निर्भर रहते हैं। सदर ताऊरू पुलिस स्टेशन के एसएचओ राजेश कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फिलहाल कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है क्योंकि कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि बिना अनुमति के इतना खतरनाक कार्यक्रम कैसे आयोजित किया गया। विस्तृत जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। यह घटना 2017 में पानीपत में हुई एक ऐसी ही दर्दनाक घटना की याद दिलाती है, जहां रेत के गड्ढे में जमीन के नीचे दबे रहने का स्टंट करने की कोशिश में एक 17 वर्षीय लड़के की मौत हो गई थी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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