Iran US war Chinese satellite help : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष में एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने वॉशिंगटन से लेकर बीजिंग तक हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने अपनी घातक मिसाइलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जिस अचूक सटीकता के साथ निशाना बनाया, उसके पीछे चीन की उन्नत जासूसी सैटेलाइट तकनीक का हाथ था। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की 'अर्थ आई' कंपनी द्वारा विकसित TEE-01B सैटेलाइट ने ईरान के लिए 'आकाश में आंख' का काम किया, जिससे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी पूरी तरह बेखबर रहीं।

इस रणनीतिक खेल की परतें तब खुलीं जब यह सामने आया कि चीनी कंपनी अंतरिक्ष में 'इन-ऑर्बिट डिलीवरी' के माध्यम से सैटेलाइट भेजती है, जिसे बाद में विदेशी ग्राहक गुप्त रूप से अधिग्रहित कर लेते हैं। TEE-01B नामक इस सैटेलाइट की क्षमता आधा मीटर के उच्च रिजॉल्यूशन पर तस्वीरें लेने की है। लीक हुए सैन्य दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि साल 2024 के अंत में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसी तकनीक के माध्यम से ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस, जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी बेस और इराक के एरबिल हवाई अड्डे की सटीक रेकी की। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्वीकार किया था कि 14 मार्च के हमले में पांच रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट तबाह हुए, जिसकी सफलता का आधार यही चीनी सैटेलाइट इमेजरी थी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी सहयोग युद्ध की दिशा बदलने वाला साबित हुआ है। ईरान मामलों की विशेषज्ञ निकोल ग्रेजेव्स्की के अनुसार, इस सैटेलाइट का उपयोग पूरी तरह से सैन्य उद्देश्यों के लिए किया गया, क्योंकि इसे नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के बजाय IRGC संचालित कर रही थी। इससे पहले ईरान अपने 'Noor-3' सैटेलाइट पर निर्भर था, जिसकी इमेजरी क्षमता चीनी सैटेलाइट की तुलना में 10 गुना कम सटीक थी। चीन की इस मदद ने न केवल ईरान को समय से पहले लक्ष्यों की पहचान करने में सक्षम बनाया, बल्कि उसे हमलों के बाद हुए नुकसान का सटीक आकलन करने की शक्ति भी प्रदान की।

ईरान के इस पलटवार ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य श्रेष्ठता को भी चुनौती दी है। सैटेलाइट डेटा की मदद से ईरान ने न केवल एयरबेस बल्कि बिजली संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी भारी नुकसान पहुँचाया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के ड्रोन और मिसाइलों ने अमेरिका-इजरायल के अत्याधुनिक F-16 और F-35 फाइटर जेट्स को भी मार गिराने का दावा किया है। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में चीन की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है और यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में तकनीकी प्रभुत्व के जरिए लड़े और जीते जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव का स्तर एक नए और अधिक खतरनाक चरण में पहुँच गया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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