"बिना जातिय जनगणना के आरक्षण केवल एक छलावा'"; अखिलेश यादव के सुर में चंद्रशेखर आजाद ने मिलाए सुर
संसद में चंद्रशेखर आजाद की मांग: महिला आरक्षण में 'कोटे के भीतर कोटा' जरूरी। अखिलेश यादव का समर्थन करते हुए राज्यसभा की सीटें 383 करने और ओबीसी आरक्षण पर घेरा।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद
Nagina MP on Women Reservation Bil : संसद के विशेष सत्र में आज उस वक्त सियासत गरमा गई जब महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा के दौरान नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार के प्रस्तावों पर कड़े सवाल दागे। लोकसभा में 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक', 'परिसीमन विधेयक 2026' और 'संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक' पर बहस के दौरान आजाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मांग का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आरक्षण के भीतर 'कोटे में कोटा' की व्यवस्था नहीं की गई, तो 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं तक कभी नहीं पहुंच पाएगा।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि वर्तमान स्वरूप में 33 प्रतिशत आरक्षण 'आधी आबादी' के साथ पूर्ण न्याय नहीं करता है। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि यदि कोटे के भीतर उप-कोटा निर्धारित नहीं किया गया, तो एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं का वास्तविक प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित होगा। सांसद ने आशंका जताई कि विशेष प्रावधानों के अभाव में इस आरक्षण का लाभ केवल वही वर्ग उठा ले जाएगा जो पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त है, जबकि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाएं राजनीति के हाशिये पर ही रह जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब हर वर्ग की भागीदारी उसकी जनसंख्या के अनुपात में हो।
सिर्फ निचले सदन तक सीमित न रहते हुए चंद्रशेखर आजाद ने उच्च सदन यानी राज्यसभा के ढांचे में भी बड़े बदलाव की वकालत की। उन्होंने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक गणित पेश करते हुए कहा कि जब लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 की जा रही हैं, तो उसी अनुपात में राज्यसभा की सीटों में भी वृद्धि अनिवार्य है। वर्तमान में राज्यसभा की सीटें लोकसभा की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत हैं, जिसे आधार मानकर आजाद ने मांग की कि राज्यसभा में सीटों की संख्या को बढ़ाकर 383 किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि संसदीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह विस्तार बेहद जरूरी है।
अपनी मांगों के अंतिम चरण में आजाद ने राज्यसभा और विधान परिषदों में भी एससी-एसटी की तर्ज पर ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश के उन सभी सदनों में जहाँ अब तक पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू नहीं है, वहां जनसंख्या के आधार पर कोटा सुनिश्चित किया जाए। नगीना सांसद के इस प्रखर रुख ने संसद के भीतर चल रही बहस को एक नया आयाम दे दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी मतदान केवल आरक्षण के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व के जटिल सवालों के इर्द-गिर्द भी घूमेगा। सदन के इस संग्राम का संदेश साफ है—विपक्ष अब प्रतीकात्मक आरक्षण के बजाय आनुपातिक हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ने के मूड में है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
