अब मजदूरों को मिलेगी धुप के तपिश से राहत; जाने क्या है केंद्र सरकार की नई एडवाइजरी ?
भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को कार्यस्थल पर ठंडा पानी, विश्राम स्थल और लचीले समय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

भीषण गर्मी के बीच ईंट भट्ठे पर काम के दौरान विश्राम करते श्रमिक
Heatwave advisory for workers India 2026 : देश के बड़े हिस्से में सूरज के तल्ख तेवर और आसमान से बरसती आग ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पारे के रिकॉर्ड तोड़ उछाल और जानलेवा हीटवेव के बीच, केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों श्रमिकों और कर्मचारियों की जान की हिफाजत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। मंगलवार को केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने एक राष्ट्रव्यापी एडवाइजरी जारी करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे भीषण गर्मी के इस दौर में श्रमिकों के लिए 'सुरक्षा कवच' तैयार करें। यह कदम उन लाखों दिहाड़ी मजदूरों, निर्माण श्रमिकों और कारखानों में काम करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर तपती दोपहर में पसीना बहाते हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि वर्तमान में देश जिस तरह के चरम तापमान का सामना कर रहा है, उसमें केवल पारंपरिक उपाय काफी नहीं हैं। मंत्रालय ने राज्यों के प्रमुख सचिवों और प्रशासकों को स्पष्ट किया है कि बाहरी क्षेत्रों और श्रम-प्रधान उद्योगों में कार्यरत कार्यबल की सुरक्षा के लिए एक बहु-क्षेत्रीय और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। सरकार ने नियोक्ताओं, औद्योगिक इकाइयों और निर्माण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे न केवल कार्य घंटों में बदलाव करें, बल्कि कार्यस्थलों पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें जिससे श्रमिकों को लू की चपेट में आने से बचाया जा सके। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की गति के बीच किसी भी श्रमिक के स्वास्थ्य के साथ समझौता न हो।
सरकारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्यों को विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के 'वर्किंग आवर्स' यानी काम के घंटों को फिर से निर्धारित करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से दोपहर के उन घंटों में जब सूरज की तपिश अपने चरम पर होती है, काम की गति को धीमा करने या समय बदलने पर विचार करने को कहा गया है। इसके अलावा, कार्यस्थलों पर पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता, छायादार विश्राम स्थल और कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था को अनिवार्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों और ईंट भट्ठों जैसे कठिन कार्यक्षेत्रों के लिए आपातकालीन बर्फ की थैलियां (आइस पैक) और गर्मी से संबंधित प्राथमिक उपचार सामग्री रखने का प्रावधान भी किया गया है। सरकार ने स्वास्थ्य विभागों के साथ तालमेल बिठाकर श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने की भी बात कही है।
औद्योगिक सुरक्षा के मोर्चे पर, सरकार ने कारखानों और खदानों के प्रबंधन के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जहां काम को रोकना संभव नहीं है, वहां 'टू-मेंबर टीम' यानी दो सदस्यीय दल नियुक्त करने की सलाह दी गई है ताकि कर्मचारी एक-दूसरे की स्थिति पर नजर रख सकें। वेंटिलेशन और शीतलन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ श्रमिकों को कार्य में लचीलापन प्रदान करने को कहा गया है। इसके साथ ही, सार्वजनिक स्थानों और 'श्रमिक चौकों' पर जागरूकता अभियान चलाने, पोस्टर और बैनर के जरिए लू से बचने के उपायों और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार करने का भी आदेश दिया गया है। केंद्र का यह हस्तक्षेप न केवल एक प्रशासनिक आदेश है, बल्कि यह बदलती जलवायु के दौर में श्रम अधिकारों और मानवीय सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रमाण है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
