बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के पैकेट पर छपे '100% नेचुरल', '100% ऑरगैनिक' या '100% शुद्ध' जैसे आकर्षक शब्दों का खेल अब कंपनियों के लिए मुसीबत बन गया है। उपभोक्ता संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने दो प्रमुख खाद्य कंपनियों, ‘मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड’ और ‘स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत की गई है, जो कंपनियों को उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से रोकता है।

प्राधिकरण की जांच में यह खुलासा हुआ कि ये कंपनियां अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर '100%' का दावा बड़े और स्पष्ट अक्षरों में करती थीं, जबकि उनके डिस्क्लेमर बेहद छोटे और अस्पष्ट अक्षरों में लिखे होते थे, जिन्हें सामान्य उपभोक्ता के लिए पढ़ पाना लगभग असंभव था। मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड के मामले में, उनकी 'आटा ब्रेड' को '100% आटा' बताकर बेचा जा रहा था, जबकि जांच में सामने आया कि उस ब्रेड में गेहूं के आटे की वास्तविक मात्रा केवल 87% थी। हालांकि कंपनी ने तर्क दिया कि यह FSSAI द्वारा निर्धारित 75% की सीमा के भीतर है, लेकिन प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि 75% की पात्रता होने का अर्थ यह नहीं है कि उत्पाद को बिना शर्त '100% आटा' कहा जाए।

इसी प्रकार, स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' और विभिन्न जूस वेरिएंट्स की भी जांच की गई। प्राधिकरण ने पाया कि जिस नारियल पानी को '100% ताज़ा' बताया जा रहा था, वह वास्तव में केवल 9.6% नारियल पानी के कॉन्संट्रेट से दोबारा तैयार किया गया था। अन्य जूस वेरिएंट्स में भी फलों का गूदा या कॉन्संट्रेट बहुत ही कम मात्रा में यानी 4% से 16% के बीच ही पाया गया, जबकि बाकी हिस्सा केवल पानी था। CCPA ने स्पष्ट किया है कि '100%' शब्द का अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट और सटीक होता है, और यदि उत्पाद इस मानक पर खरा नहीं उतरता है, तो इसे ग्राहकों को धोखा देना माना जाएगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे ही भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से सुरक्षा प्रदान करना है। इस अधिनियम के तहत ही CCPA को यह अधिकार प्राप्त है कि वह भ्रामक विज्ञापनों की जांच करे, कंपनियों को उन्हें वापस लेने का निर्देश दे और उन पर जुर्माना लगाए। भारतीय न्याय व्यवस्था और कानून यह मानते हैं कि उपभोक्ता का अधिकार है कि उसे उत्पाद के बारे में पूर्ण, स्पष्ट और सत्य जानकारी मिले ताकि वह सोच-समझकर खरीद का निर्णय ले सके।

यह कार्रवाई केवल दो कंपनियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि मार्केटिंग के नाम पर किए जाने वाले भ्रामक दावे अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। कंपनियों को अपने विज्ञापनों और पैकेजिंग पर किए गए हर दावे को प्रमाणित करना होगा और पारदर्शिता बनाए रखनी होगी। यह कानूनी हस्तक्षेप उपभोक्ता अधिकारों के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसका उद्देश्य खाद्य उद्योग में ईमानदारी और ग्राहकों के प्रति जवाबदेही की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। भविष्य में यदि कोई भी उपभोक्ता किसी कंपनी के भ्रामक दावों से प्रभावित होता है, तो वह उपभोक्ता प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जो उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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