छात्र सार्थक सिद्धांत ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर शर्तों में किए गए बदलावों को उजागर किया, जिससे हैदराबाद की एक निजी कंपनी को अनुबंध मिलने पर उठे सवाल।

CBSE tender tweaks Sarthak Sidhant : देश की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया एक अभूतपूर्व विवाद के भंवर में फंस गई है, जिसने बोर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि बारहवीं कक्षा के एक छात्र ने अपनी तीक्ष्ण तार्किक क्षमता के बल पर सीबीएसई के करोड़ों रुपये के टेंडर में की गई कथित हेराफेरी को बेनकाब किया है। छात्र द्वारा सूचना के अधिकार और सार्वजनिक दस्तावेजों के विश्लेषण से जुटाए गए तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि बोर्ड ने परीक्षा कॉपियों के ऑनलाइन मूल्यांकन, यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम के टेंडर नियमों में जानबूझकर ऐसी ढील दी, जिससे एक खास विवादित कंपनी को सीधा फायदा मिल सके। इस खुलासे के बाद देश भर के लाखों अभिभावकों और शिक्षाविदों में भारी आक्रोश फैल गया है।

इस बड़े खुलासे के केंद्र में सार्थक सिद्धांत नामक छात्र है, जिसने सीबीएसई द्वारा साल 2025 में जारी किए गए तीन अलग-अलग रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) दस्तावेजों का बारीक तकनीकी अध्ययन किया। छात्र का आरोप है कि बोर्ड ने अपनी निविदा शर्तों में क्रमिक रूप से कई बड़े और संदिग्ध बदलाव किए। सबसे चौंकाने वाला बदलाव यह था कि टेंडर की शुरुआती शर्तों में शामिल उस महत्वपूर्ण नियम को हटा दिया गया, जिसके तहत अतीत में ब्लैकलिस्ट या दंडित हो चुकी कंपनियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाना था। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं की गुणवत्ता मापने वाले सीएमएमआई (CMMI) मानक को लेवल 5 से घटाकर सीधे लेवल 3 कर दिया गया, ताकि कम योग्यता वाली कंपनियां भी दौड़ में शामिल हो सकें। इतना ही नहीं, डेटा सुरक्षा के कड़े नियमों को ताक पर रखते हुए निजी डेटा सेंटरों की अनिवार्य शर्त को बदलकर सरकारी क्लाउड के उपयोग की छूट दे दी गई। इन तमाम संशोधनों का सीधा लाभ हैदराबाद की कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक' को मिला, जिसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की 65 रुपये प्रति कॉपी की बोली के मुकाबले महज 24.75 रुपये की बेहद कम बोली लगाकर इस बड़े अनुबंध को अपने नाम कर लिया।

इस पूरे मामले के आधिकारिक और कानूनी पहलू पर नजर डालें तो सीबीएसई प्रबंधन ने किसी भी प्रकार के पक्षपात या भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड का तर्क है कि टेंडर की शर्तों में किए गए बदलाव किसी कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से योग्य फर्मों को आकर्षित करने के लिए किए गए थे, क्योंकि शुरुआती दौर में कोई भी उपयुक्त कंपनी बोली लगाने सामने नहीं आ रही थी। सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि अंतिम दौर में कोएम्प्ट एडुटेक और टीसीएस दोनों ही तकनीकी मानकों पर खरी उतरी थीं और न्यूनतम बोली के आधार पर ही ठेका आवंटित किया गया। हालांकि, बोर्ड के पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि उसने कोएम्प्ट एडुटेक के उस विवादित इतिहास को क्यों नजरअंदाज किया, जब साल 2019 में तेलंगाना में इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजों के मूल्यांकन में हुई भारी गड़बड़ी और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों में इस कंपनी का नाम प्रमुखता से उछला था।


यह टेंडर विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सीबीएसई का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पहले से ही तकनीकी विफलताओं के कारण चौतरफा विवादों से घिरा हुआ है। इससे पहले दो अन्य छात्रों ने बोर्ड के मूल्यांकन पोर्टल में गंभीर सुरक्षा कमियों और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में आ रही बड़ी त्रुटियों को उजागर किया था। इन तकनीकी खामियों का सीधा असर परीक्षा परिणामों पर पड़ता दिख रहा है, जहां इस बार बोर्ड का पासिंग प्रतिशत गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 85.2 प्रतिशत पर आ गया है। इस गड़बड़ी के चलते देश भर से 11 लाख से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है, जिससे व्यथित होकर अभिभावक अब पूरे मूल्यांकन तंत्र के निष्पक्ष ऑडिट और इस टेंडर प्रक्रिया की उच्च स्तरीय कानूनी जांच की मांग कर रहे हैं।

बारहवीं कक्षा के एक छात्र द्वारा उजागर किया गया यह टेंडर संशोधन का मामला महज एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर एक गहरा आघात है। डिजिटल मूल्यांकन के नाम पर नियमों को लचीला बनाने की यह प्रवृत्ति शिक्षा व्यवस्था में बैठे नीति-निर्धारकों की मंशा को संदिग्ध बनाती है। यह घटना इस बात की ओर पुरजोर इशारा करती है कि यदि तकनीकी और वित्तीय अनुबंधों की निगरानी प्रणाली को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो छात्रों का देश की शीर्ष मूल्यांकन संस्थाओं पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा, जिसका दूरगामी प्रभाव भारतीय शिक्षा जगत की साख पर पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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