कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवारवालों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। इस बीमारी से लड़ना जितना मानसिक और शारीरिक रूप से कठिन होता है, उतना ही आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर जब बात कैंसर की महंगी दवाइयों की आती है, तो आम आदमी की आधी से ज्यादा जमापूंजी इलाज में ही खर्च हो जाती है। लेकिन अब देश के कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए (NPPA) द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, कैंसर के इलाज में काम आने वाली कई प्रमुख दवाओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के इस अहम कदम के बाद अब कैंसर की दवाएं और इंजेक्शन बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होने लगे हैं, जिससे मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।

भारतीय परिवारों के लिए किसी अपने को कैंसर होने पर सबसे बड़ी चिंता उसकी दवाइयों और इलाज के भारी-भरकम खर्च को उठाने की होती है। अब तक कैंसर की कई दवाइयां इतनी ज्यादा महंगी आती थीं कि आम आदमी उन्हें खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। लेकिन केंद्र सरकार के एक कड़े फैसले के बाद अब तस्वीर बदलने लगी है। सरकार के इस कदम से भारत में कैंसर की कई जरूरी दवाइयां पहले के मुकाबले बेहद कम कीमत पर मिलेंगी। उदाहरण के तौर पर, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले पैल्बोसाइक्लिब कैप्सूल का एक प्रमुख ब्रांड, जिसकी कीमत पहले 40,421 रुपये हुआ करती थी, अब वह घटकर मात्र 2,720 रुपये रह गया है। इसी तरह थियोटेपा इंजेक्शन, जिसकी कीमत पहले 80,072 रुपये थी, अब घटकर 7,150 रुपये का हो गया है। कीमतों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट से मरीजों के परिवारों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो गया है।

इस पूरी प्रक्रिया के तहत भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए ने कैंसर से जुड़ी 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 प्रतिशत तक की बड़ी और राहत भरी कटौती की है। सरकार द्वारा यह बड़ा कदम तब उठाया गया जब अधिकारियों ने 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने का सख्त फैसला लिया था। इससे पहले जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं पर बिचौलियों, बड़ी कंपनियों और अस्पतालों द्वारा बहुत ज्यादा मुनाफा वसूला जा रहा था, जिससे मरीजों को अपनी जेब से कई गुना ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते थे। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कैंसर की दवाओं पर अस्पतालों द्वारा की जा रही इस मनमानी और अत्यधिक वसूली पर कड़ी फटकार लगाई थी, जिसके बाद सरकार ने यह सख्त और जनहित में बड़ा फैसला लिया है।

दवाओं की इस नई सूची पर नजर डालें तो कैंसर की कई प्रमुख और जीवन रक्षक दवाओं के दाम जमीन पर आ गए हैं। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में काम आने वाली दवा पैल्बोसाइक्लिब (125 एमजी, 21 कैप्सूल पैक) की कीमत में 93.3 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है, जिससे यह 40,421.33 रुपये से सीधे घटकर 2,720 रुपये रह गई है। इसके अलावा कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाला 100 एमजी का थिओटेपा इंजेक्शन अब लगभग 91 प्रतिशत सस्ता होकर 80,071.86 रुपये के बजाय केवल 7,150.33 रुपये में मिल रहा है। प्रोस्टेट कैंसर के इलाज की दवा 'एबीरालाइव' (250 एमजी, 120 टैबलेट पैक) की कीमत भी करीब 83 प्रतिशत कम हुई है, जो पहले 28,000 रुपये की थी और अब घटकर 4,840 रुपये पर आ गई है।

केवल यही नहीं, ब्रेस्ट कैंसर की एक अन्य दवा 'वोमाजोल' (10 टैबलेट का पैक) अब 458.85 रुपये के बजाय केवल 39.52 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं कोलोरेक्टल, फेफड़े और गुर्दे के कैंसर के इलाज में काम आने वाले बायोसिमिलर वेरिएंट 'इव्ज़ुमैब' (400 मिलीग्राम इंजेक्शन) की कीमत में भी 81 प्रतिशत की भारी कमी आई है, जिसके बाद यह 69,852.12 रुपये से घटकर 13,512 रुपये रह गई है। इन जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं के दामों में भारी कमी आने से उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है जो लगातार महंगे इलाज के कारण कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे थे।

हालांकि, इस राहत के बीच यह भी जानना जरूरी है कि अभी भी कैंसर की कुछ ऐसी दवाएं और ब्रांड्स हैं जिनके दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एनपीपीए की इस सूची में कुछ नई और बेहद महंगी दवाएं भी शामिल हैं, जिनकी पुरानी और संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत एक जैसी ही बनी हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई दवाएं 'पेटेंट वाली दवाएं' हैं, जिन पर पेटेंट के नियम लागू होते हैं। इन दवाओं में ओसिमर्टिनिब, एलेक्टीनिनिब, ट्रेमेलिमुमब, डोस्टारलिमब, इवोसिडेनिब, सेलुमेटिनिब और पेम्ब्रोलिज़ुमब जैसी आधुनिक दवाइयां शामिल हैं।

इन खास दवाओं की कीमतें अभी भी काफी ज्यादा हैं। उदाहरण के लिए, ओसिमर्टिनिब (जिसका ब्रांड नाम टैग्रिसो है) की कीमत 4.16 लाख रुपये है। इसी तरह एलेक्सिटिनिब (ब्रांड नाम एलेन्सा) की कीमत 4.31 लाख रुपये, ट्रेमेलिमुमब (इमजुडो, 300 mg इंजेक्शन) की कीमत 4.18 लाख रुपये, और डोस्टारलिमब (जेम्परली, 500 mg इंजेक्शन) की कीमत 3.91 लाख रुपये है। इसके अलावा इवोसिडेनिब (टिबसोवो, 250 mg, 60 टैबलेट) की कीमत 6.58 लाख रुपये, सेलुमेटिनिब (कोसेलुगो, 25 mg, 60 कैप्सूल) की कीमत 10.22 लाख रुपये और पेम्ब्रोलिजुमब (कीट्रूडा) की एक 100 mg शीशी की कीमत 2.17 लाख रुपये दर्ज की गई है। इन पेटेंट दवाओं के दाम कम न होने के कारण इन बीमारियों के मरीजों को अभी पूरी राहत नहीं मिल पाई है, लेकिन फिर भी अधिकांश जरूरी और आम इस्तेमाल होने वाली कैंसर की दवाओं के दाम घटने से देश के लाखों मरीजों और उनके तीमारदारों को बड़ी राहत मिली है और वे अब बिना किसी आर्थिक डर के अपने इलाज को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा पा रहे हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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