कनाडा का बड़ा एक्शन: 26/11 के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की नागरिकता होगी खत्म और क्यों पीएम मोदी से मुलाकात से पहले कनाडा ने लिया यह फैसला।
कनाडा सरकार ने 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा की नागरिकता छीनने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से ठीक पहले आए इस फैसले के पीछे के असली कारणों और राजनीतिक मायनों को समझें।

Canada's big action—26/11 mastermind Tahawwur Rana's citizenship will be revoked
तहव्वुर राणा और कनाडा की नागरिकता: कूटनीति, कानून और न्याय की लंबी लड़ाई
भारत और कनाडा के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के संकेत मिल रहे हैं। एक बड़े घटनाक्रम में, कनाडा सरकार ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा की नागरिकता छीनने की आधिकारिक कार्यवाही शुरू कर दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत के साथ टूटे हुए रिश्तों को सुधारने और एक बड़ी व्यापारिक डील (Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए भारत आ रहे हैं।
कौन है तहव्वुर राणा?
65 वर्षीय तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। वह पेशे से एक व्यवसायी है जिसने 1997 में कनाडा की ओर रुख किया और 2001 में वहां की नागरिकता हासिल कर ली। हालांकि, बाहरी तौर पर एक साधारण बिजनेसमैन दिखने वाले राणा का नाम आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक '26/11 मुंबई हमले' से जुड़ा, जिसमें 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी।
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने पाया कि राणा ने अपने पुराने दोस्त डेविड कोलमैन हेडली (जो हमले का मुख्य रेकी करने वाला था) की मदद की थी। राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अमेरिका की एक जूरी ने उसे मुंबई हमलों में सीधे शामिल होने के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन उसे डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था।
नागरिकता छीनने की असली वजह: आतंकवाद नहीं, 'झूठ'
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ यह है कि कनाडा सरकार राणा की नागरिकता 'आतंकवाद' के आधार पर नहीं, बल्कि 'धोखाधड़ी' के आधार पर छीन रही है। कनाडा के आव्रजन नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता के आवेदन पत्र में गलत जानकारी देता है या झूठ बोलता है, तो उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है।
राणा पर आरोप है कि उसने 25 साल पहले अपने आवेदन फॉर्म में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया था। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता छीनने का यह रास्ता तकनीकी रूप से आसान है और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच कनाडा के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। यदि फेडरल कोर्ट इस पर मुहर लगा देता है, तो राणा कनाडा का नागरिक नहीं रहेगा और केवल एक 'परमानेंट रेजिडेंट' बनकर रह जाएगा।
प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा और टाइमिंग का महत्व
कनाडा द्वारा इस फैसले की घोषणा का समय बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी को भारत के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। वह सबसे पहले मुंबई जाएंगे (वही शहर जो 26/11 का गवाह रहा) और फिर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य:
- व्यापार (Trade): पिछले साल भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30.8 बिलियन डॉलर रहा। दोनों देश इसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रख रहे हैं।
- रणनीतिक सहयोग: ऊर्जा, तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में नए समझौतों पर चर्चा होनी है।
- रिश्तों की मरम्मत: हालिया तनाव के बाद, यह यात्रा दोनों देशों के बीच भरोसे को दोबारा कायम करने की कोशिश है।
भारत लंबे समय से कनाडा से उन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ऐसे में कार्नी की यात्रा से ठीक पहले 'भारत के दुश्मन' राणा पर कार्रवाई करना एक सकारात्मक कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
वर्तमान स्थिति: भारत की हिरासत में राणा
तहव्वुर राणा फिलहाल भारत की जेल में है। पिछले साल अप्रैल में अमेरिका द्वारा प्रत्यर्पित (Extradite) किए जाने के बाद, उसे एक विशेष विमान और सशस्त्र गार्डों के साथ दिल्ली लाया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में रहने के बाद अब उस पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
भारत ने हमेशा राणा को मुंबई हमलों का 'मास्टरमाइंड' माना है। कनाडा की नागरिकता रद्द होने से उसे मिलने वाला राजनयिक संरक्षण (Diplomatic Protection) खत्म हो जाएगा, जिससे भारत के लिए अपनी कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना और आसान होगा।
तहव्वुर राणा की नागरिकता छीनने की प्रक्रिया केवल एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों का हिस्सा है। कनाडा के इस कदम से भारत के साथ उसके व्यापारिक और राजनीतिक संबंध फिर से पटरी पर लौट सकते हैं। न्याय की लंबी प्रतीक्षा कर रहे 26/11 के पीड़ितों के लिए यह खबर एक उम्मीद की किरण है कि साजिशकर्ताओं पर हर तरफ से शिकंजा कस रहा है।

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