मदरसा वंदे मातरम विवाद: 'पूरा गीत गाने से कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा', कलकत्ता हाईकोर्ट की दो टूक|
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के खिलाफ दायर PIL पर कहा कि पूरा गीत गाने से कोई आसमान नहीं टूटेगा।

कलकत्ता हाईकोर्ट भवन के बाहर का दृश्य जहां मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के आदेश के खिलाफ दायर PIL पर सुनवाई हुई।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मदरसों में वंदे मातरम पर उठाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि छात्र पूरा वंदे मातरम गा लेते हैं, तो इससे कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के मदरसों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के छह छंदों को अनिवार्य करने के सरकारी आदेश से जुड़ा हुआ है, जिसके खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. हावड़ा के रहने वाले मोहम्मद महताबुद्दीन लस्कर ने यह याचिका दायर की है, जो खुद को हावड़ा के संकराइल स्थित एक मदरसे के नाबालिग छात्र का अभिभावक बताते हैं. याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार के मदरसा शिक्षा निदेशालय द्वारा 19 मई को जारी किया गया यह निर्देश संविधान के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. इसमें मुख्य रूप से अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार, अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 25(1) के तहत धर्म की स्वतंत्रता के हनन होने की बात कही गई है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि जब देश का संविधान अपनाया गया था, तब व्यापक विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रगीत के केवल दो छंदों को शामिल करने का निर्णय लिया गया था|
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से इसे गाना चाहता है तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, परंतु इस तरह के मामलों में इसे जबरन थोपा जाना उचित नहीं है. उनका यह भी मानना था कि इस प्रकार की अनिवार्यता से सांप्रदायिक सद्भाव पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और काफी संघर्ष व खून-खराबे के बाद देश को जो आजादी मिली थी, उसके परिप्रेक्ष्य में यह चिंता का विषय है. इस मामले की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तापब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकीलों और अन्य पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में हजारों ईसाई शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं, जहां विद्यार्थियों से प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है. ऐसी स्थिति में क्या किसी खास धर्म से ताल्लुक रखने वाले छात्र यह सवाल उठाते हैं कि उनसे ऐसी प्रार्थनाएं क्यों कराई जा रही हैं? अदालत ने न्यायसंगत सवाल पूछते हुए कहा कि यदि आज कोई व्यक्ति किसी ऐसी बात को दोहराने के लिए कहे जो उसके व्यक्तिगत धर्म का हिस्सा नहीं है, तो क्या इससे वह अपने धर्म से बाहर हो जाएगा या कोई संकट आ जाएगा?
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शुरुआती स्तर पर इस आदेश को लागू करने वाले मेमो के अधिकार क्षेत्र के संबंध में दिए गए तर्कों में कुछ दम अवश्य नजर आता है, लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या इसके तहत कोई जबरन सख्त कार्रवाई की गई है या नहीं. न्यायूर्ति ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभी तक ऐसा कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया है जिससे यह साबित हो सके कि वंदे मातरम न गाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई हो या किसी को कोई वास्तविक परेशानी उठानी पड़ी हो. इसके अतिरिक्त, इस मामले में सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका के संदर्भ में वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने संसद में इस विषय पर हुई पुरानी बहसों का हवाला दिया|
वहीं दूसरी ओर, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने इस सरकारी नोटिफिकेशन पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने या अंतरिम आदेश पारित करने की मांग का कड़ा विरोध किया. उन्होंने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा कि दुर्भाग्यवश इस तरह की कई जनहित याचिकाएं केवल पब्लिसिटी हासिल करने के उद्देश्य से दायर की जाती हैं, जिनका वास्तविक न्याय से कोई सरोकार नहीं होता. इस पूरी कानूनी प्रक्रिया और उच्च न्यायालय की टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया है कि अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर कानूनी दायरे और संवैधानिक प्रावधानों के तहत पूरी गंभीरता से विचार कर रही है, और किसी भी तरह की जल्दबाजी में अंतरिम रोक लगाने से पहले सभी पक्षों के तर्कों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है.

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
