बांग्लादेश के दौलतपुर उपजफला में पद्मा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। रामकृष्णपुर और चिलमारी यूनियनों के 'चर' इलाकों के 35 गांवों में करीब 60,000 लोग फंस चुके हैं। इसी उफान और रौद्र रूप वाली पद्मा नदी के बीच पश्चिम बंगाल की सीमा की तरफ एक बड़ी दुर्घटना टल गई, जहां बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवानों ने एक नवजात समेत 10 बांग्लादेशी नागरिकों की जान बचाई।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पद्मा नदी में तेज लहरों और बहाव के कारण एक नाव पलट गई थी। इस नाव पर सवार बांग्लादेश के चापईनावाबगंज जिले के रहने वाले सभी यात्री नदी के तेज बहाव में बह गए थे, लेकिन गनीमत यह रही कि वे तैरकर किसी तरह सुरक्षित जगह तक पहुंचने में कामयाब रहे। नदी किनारे गश्त कर रहे BSF के जवानों की नजर जब इन फंसे हुए लोगों पर पड़ी, तो उन्होंने बिना देर किए तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया।

बचे हुए सभी लोगों तक सुरक्षित पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने के लिए लालगोला के तारा नगर इलाके से एक स्पीड बोट तुरंत रवाना की गई। BSF के जवानों ने सभी 10 नागरिकों को सुरक्षित किनारे पर पहुंचाया। इसके बाद सभी को मेडिकल जांच और शुरुआती इलाज के लिए नजदीकी स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने के बाद जब सभी की हालत पूरी तरह स्थिर पाई गई, तब BSF ने आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से वापस बांग्लादेश भेजने की समुचित व्यवस्था की।

दूसरी ओर, बांग्लादेश में पद्मा नदी का जलस्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान नदी के जलस्तर में 3 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हार्डिंग ब्रिज पॉइंट पर यह खतरे के निशान से महज 75 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। पाबना वॉटर डेवलपमेंट बोर्ड (PWDB) के हाइड्रोलॉजी डिवीजन के अनुसार, सुबह 9:00 बजे जलस्तर 13.05 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 13.80 मीटर है। इससे पहले शुक्रवार को इसी समय जलस्तर 13.02 मीटर था।

इस भयंकर जलस्तर वृद्धि के कारण बांग्लादेश के 17 गांव सीधे तौर पर बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिससे लगभग 30,000 लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रामकृष्णपुर यूनियन परिषद के चेयरमैन सिराज मोंडल ने जानकारी दी है कि उनकी यूनियन के सभी 16 गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि रास्ते और सड़कें पूरी तरह डूब चुकी हैं, जिसके चलते अब केवल नाव और कामचलाऊ बेड़े ही आवागमन का एकमात्र साधन बचे हैं। बाढ़ के इस पानी से स्थानीय किसानों की मिर्च और केले की खेती को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जलस्तर का बढ़ना इसी तरह जारी रहा, तो जनजीवन और कृषि को होने वाला यह नुकसान और अधिक बढ़ सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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