ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: नई दिल्ली में वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय, पश्चिम एशिया संकट पर केंद्रित रहेगी चर्चा|
भारत की अध्यक्षता में आज से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे अध्यक्षता, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक शासन सुधार मुख्य एजेंडा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जहाँ ब्रिक्स 2026 का आधिकारिक लोगो प्रदर्शित है।
नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स' (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक आज राजधानी दिल्ली में शुरू होने जा रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच आयोजित हो रही यह बैठक कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें सदस्य देशों के शीर्ष राजनयिक और प्रतिनिधि बदलते अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर गहन मंथन करेंगे। यह आयोजन न केवल भारत की अध्यक्षता के तहत पहली बड़ी मंत्रीस्तरीय बैठक है, बल्कि यह इस साल के अंत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए मुख्य एजेंडा भी निर्धारित करेगी।
भारत ने अपनी 'ब्रिक्स 2026' अध्यक्षता के लिए 'मानवता सबसे पहले' और 'जन-केंद्रित दृष्टिकोण' की थीम को केंद्र में रखा है। इस दृष्टिकोण का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान किया था। भारत की अध्यक्षता का आधिकारिक लोगो और वेबसाइट हाल ही में लॉन्च की गई थी, जो वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच नई दिल्ली की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करती है। यह चौथा अवसर है जब भारत ब्रिक्स के शिखर स्तर के आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक साख स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस दो दिवसीय बैठक के दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम होंगे। वर्तमान में पश्चिम एशिया में बढ़ रही अस्थिरता और युद्ध की स्थिति सदस्य देशों के बीच चिंता का प्रमुख विषय है। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय शासन संरचनाओं (Global Governance Structures) में सुधार, जो काफी समय से लंबित है, उस पर भी ब्रिक्स देश साझा रणनीति बनाने का प्रयास करेंगे। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी प्रतिनिधिमंडल अपनी उपस्थिति का स्तर स्वयं तय कर रहे हैं और कई देशों के वरिष्ठ राजनयिक पहले ही दिल्ली पहुँच चुके हैं।
बैठक के कार्यक्रम के अनुसार, शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले विभिन्न प्रतिनिधि अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे। यह मुलाकात भारत के द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स के भीतर सामूहिक विकास की प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करेगी। साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को और अधिक गहरा बनाना है। विशेष रूप से उभरती हुई वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक मंदी के खतरों के बीच ब्रिक्स समूह को एक सशक्त विकल्प के रूप में पेश करने की तैयारी है।
नई दिल्ली में आयोजित हो रही यह बैठक वैश्विक व्यवस्था में शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। जहाँ एक ओर पश्चिमी देशों का प्रभाव परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, वहीं ब्रिक्स समूह का विस्तार और भारत का नेतृत्व एक नई विश्व व्यवस्था की आधारशिला रख सकता है। दो दिनों तक चलने वाली इस चर्चा के परिणाम न केवल सदस्य देशों के भविष्य के लिए दिशा तय करेंगे, बल्कि संपूर्ण वैश्विक कूटनीति पर इनका गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत अपनी अध्यक्षता के माध्यम से शांति, स्थिरता और विकास के संदेश को विश्व पटल पर प्रभावी ढंग से रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
