बीएमसी में बगावत की आहट, उद्धव ठाकरे के 25 पार्षद शिंदे गुट के संपर्क में, छोड़ सकते हैं साथ|
शिवसेना यूबीटी के 25 पार्षद शिंदे गुट के संपर्क में होने का दावा, पार्टी में बढ़ता असंतोष।

बाएं से दाएं उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, जो महाराष्ट्र की बदलती राजनीति के केंद्र में हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में उठा-पटक का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी के लिए अब मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में भी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के छह लोकसभा सांसदों के एक महत्वपूर्ण बैठक से दूरी बनाने के बाद, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उद्धव गुट अब और भी कमजोर हो सकता है। इस बीच, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उद्धव गुट के कम से कम 25 पार्षद सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और वे जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं।
शिवसेना नेता अमेय घोले ने इस दावे की पुष्टि करते हुए कहा है कि यूबीटी खेमे में असंतोष चरम पर है। उनका आरोप है कि उद्धव ठाकरे गुट के शीर्ष नेतृत्व द्वारा पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। घोले के अनुसार, पार्टी के कई विधायक और सांसद नेतृत्व तक अपनी बात नहीं पहुँचा पा रहे हैं और मिलने के उचित अवसर न मिलने के कारण उनमें निराशा बढ़ रही है। इसी असंतोष के चलते कई स्थानीय नेता अब एकनाथ शिंदे की कार्यशैली को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस राजनीतिक हलचल के बीच भाजपा के वरिष्ठ मंत्री गिरीश महाजन ने भी दावा किया है कि बीएमसी में शिवसेना यूबीटी के पार्षद जल्द ही पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। महाजन ने कहा कि उद्धव गुट के नेता और कार्यकर्ता पार्टी के तौर-तरीकों से निराश हैं। उन्होंने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर संजय राउत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी में अब कोई भी हंगामा करने वाला नहीं बचा है और जो नेता पहले साथ थे, वे अब बदल चुके हैं। महाजन ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव गुट अब कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ मिलकर राजनीति कर रहा है, जिससे जमीनी कार्यकर्ता असहज हैं।
शिवसेना (शिंदे गुट) ने यह भी दावा किया है कि उसने यूबीटी के दो-तिहाई पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें पार्टी के सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं को विशेष जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। दूसरी ओर, जिला जाति जांच समिति द्वारा दीपक सावंत का जाति प्रमाण पत्र अमान्य घोषित किए जाने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त होना उद्धव गुट के लिए एक और बड़ा कानूनी झटका साबित हुआ है। पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और पार्षदों के पलायन की खबरों ने उद्धव ठाकरे के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सच साबित होता है, तो बीएमसी की सत्ता पर पकड़ बनाए रखना उद्धव गुट के लिए लगभग असंभव हो जाएगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
