चुनाव आयोग के रुझानों में बीजेपी 148 सीटों के साथ बहुमत की ओर, ममता बनर्जी के 15 साल पुराने शासन में सेंध।

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक धरा पर एक नए युग का सूत्रपात होता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के जो शुरुआती आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे न केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक वैचारिक विजय के समान हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी रुझानों के अनुसार, 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी 148 के जादुई आंकड़े को पार कर बहुमत हासिल करती दिख रही है। मीडिया गलियारों में यह संख्या 160 के पार जाने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 107 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संपूर्ण चुनाव अभियान के दौरान लगातार जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख किया। डॉ. मुखर्जी, जिन्हें बीजेपी का 'पितामह' माना जाता है, बंगाल की मिट्टी के ही लाल थे। उनके द्वारा रोपित जनसंघ के विचारों ने ही कालांतर में भारतीय जनता पार्टी का स्वरूप लिया। मोदी और शाह के लिए बंगाल की यह जीत केवल एक राज्य की सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने वैचारिक पूर्वज के संकल्पों को उनकी अपनी जन्मभूमि पर साकार करना है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान स्वतंत्र भारत के इतिहास में अमिट है। कलकत्ता में जन्मे मुखर्जी मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे। नेहरू मंत्रिमंडल में उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने कांग्रेस का त्याग किया और 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। बंगाल के विभाजन के समय उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही थी; यदि उन्होंने हिंदू बहुल पश्चिम बंगाल के गठन के लिए आवाज न उठाई होती, तो आज पूरा बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा हो सकता था। उन्होंने लॉर्ड माउंटबेटन को पत्र लिखकर और विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवाकर पश्चिम बंगाल के अस्तित्व को सुनिश्चित किया था।

चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बैरकपुर की सभा में स्पष्ट किया था कि जिस तरह केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर मुखर्जी के एक संकल्प को पूरा किया, उसी तरह बंगाल की नई सरकार राज्य की समृद्धि और शरणार्थी समस्याओं का समाधान कर उनके दूसरे बड़े सपने को पूरा करेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने भी 30 दिसंबर 2025 को हुंकार भरते हुए कहा था कि बीजेपी की सरकार बनते ही बंगाल की संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाएगा और घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। शाह का वह बयान कि "इंसान तो क्या परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा," चुनाव के दौरान बेहद चर्चित रहा था।

इस संभावित विजय की पटकथा मोदी और शाह के अथक दौरों और सूक्ष्म रणनीति से लिखी गई है। अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बंगाल के 19 जिलों के 24 शहरों में रैलियां और रोड शो किए। वहीं, अमित शाह ने बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने के लिए राज्य में ही डेरा डाल दिया था। 2021 की तुलना में इस बार की रणनीति कहीं अधिक सघन और प्रभावी नजर आई। यह जीत भारतीय राजनीति में इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट विजन और अपनी वैचारिक जड़ों के साथ जनता के बीच जाता है, तो दशकों पुरानी राजनीतिक व्यवस्थाओं में भी सेंध लगाई जा सकती है। बंगाल का यह परिणाम आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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