ममता बनाम शुभेंदु की जंग के बीच सुलग उठा बंगाल- नदिया में बीजेपी एजेंट को रॉड और बंदूक की बट से पीटा, हालत गंभीर!
चपरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा एजेंट को रॉड और बंदूक की बट से पीटा गया, पार्टी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाया गंभीर आरोप।

नदिया में मतदान के दौरान बीजेपी एजेंट पर हमले के बाद सुरक्षा स्थिति का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी और स्थानीय प्रशासन।
कोलकाता/नदिया। भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सवों में से एक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा और अंतिम चरण आज हिंसा की छिटपुट लेकिन गंभीर घटनाओं के बीच शुरू हुआ। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा की शेष 142 सीटों पर आज मतदान जारी है, लेकिन नदिया जिले से आई एक विचलित करने वाली खबर ने चुनावी निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नदिया के चपरा विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के एक बूथ एजेंट पर प्राणघातक हमला किया गया, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 6:00 बजे की है जब भाजपा का बूथ एजेंट मतदान केंद्र की ओर जा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं और कथित 'गुंडों' ने उसे घेर लिया। हमलावरों ने न केवल लाठियों और लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया, बल्कि बंदूक की बट से भी एजेंट के सिर पर वार किया। इस हमले में एजेंट को गंभीर चोटें आई हैं और उसके सिर से अत्यधिक रक्तस्राव होने की जानकारी मिली है। भाजपा प्रत्याशी सैकत सरकार ने इस कृत्य के लिए सीधे तौर पर टीएमसी उम्मीदवार के करीबियों को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का दावा है कि मफीदुल नामक व्यक्ति के नेतृत्व में इस हमले को अंजाम दिया गया ताकि भाजपा के पोलिंग एजेंटों के मन में भय पैदा कर उन्हें बूथों से दूर रखा जा सके।
आज का यह मतदान चरण बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। सबकी निगाहें भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम से मौजूदा विधायक हैं, लेकिन इस बार भवानीपुर का चुनावी रण राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। कोलकाता सहित छह जिलों की इन 142 सीटों पर कुल 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता 1,448 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस चरण में 1,64,35,627 पुरुष और 1,57,37,418 महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें 792 थर्ड जेंडर मतदाता भी शामिल हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद नदिया जैसी घटनाएं निर्वाचन आयोग की चुनौतियों को बढ़ा देती हैं। आयोग ने बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था की है, जिसमें 100 वर्ष से अधिक आयु के 3,243 मतदाता और 85 वर्ष से अधिक उम्र के 1.96 लाख मतदाता शामिल हैं। हालांकि, धरातल पर हो रही हिंसा मतदाताओं के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। भाजपा ने इस घटना की लिखित शिकायत चुनाव आयोग से की है और प्रभावित बूथों पर अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है। वहीं, टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा का आंतरिक कलह और हार के डर से उपजा विलाप बताया है।
जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, लेकिन नदिया में हुई इस खून-खराबे की घटना ने एक बार फिर बंगाल की चुनावी संस्कृति और राजनीतिक सहिष्णुता पर बहस छेड़ दी है। शाम तक आने वाले मतदान प्रतिशत और छिटपुट हिंसा की रिपोर्टें यह तय करेंगी कि क्या प्रशासन इस अंतिम और निर्णायक चरण को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सफल रहा या एक बार फिर हिंसा लोकतंत्र पर भारी पड़ी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
