भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन: MSP पर पूरी मूंग खरीदी की मांग, राजधानी की सड़कें जाम, स्कूल बंद|
मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण प्रणाली के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान भोपाल में धरने पर बैठे हैं।

होशंगाबाद रोड पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था भोपाल में।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का असंतोष एक बार फिर सड़कों पर खुलकर सामने आ गया है, जहां हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने मुख्यमंत्री निवास से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर डेरा डाल दिया है। ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण में लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले यह बड़ा आंदोलन शुरू हुआ है। सरकार के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता विफल होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे राजधानी की मुख्य यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और एहतियात के तौर पर कई स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा है।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब किसान प्रतिनिधिमंडल और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के बीच मूंग खरीदी के कोटे को लेकर बैठक बेनतीजा साबित हुई। हालांकि मंत्री कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में मूंग का प्रोक्योरमेंट टारगेट 4.54 लाख टन से बढ़ाकर 8.06 लाख टन करने की मांग की है, क्योंकि राज्य में इस बार 20.16 लाख टन मूंग उत्पादन का अनुमान है। बावजूद इसके, किसान इस बात पर अड़े हैं कि सरकार इस सीजन की पूरी मूंग फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में रजिस्टर्ड 3.47 लाख किसानों में से अब तक केवल 82,000 किसानों ने ही अपनी फसल बेची है, जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
प्रदर्शनकारियों ने बरखेड़ा से 'किसान क्रांति' मार्च की शुरुआत की और होशंगाबाद रोड की ओर बढ़े, जहां पुलिस द्वारा लगाए गए कई बैरिकेड्स को तोड़ते हुए वे मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए। आंदोलन की व्यापकता को देखते हुए प्रशासन ने सीएसआईआर-एंप्री त्रिजंक्शन से लेकर बागसेवनिया स्क्वायर तक भारी पुलिस बल तैनात किया है। ट्रैफिक पुलिस ने जाम से निपटने के लिए वाहनों को एम्स, कटारा Hils और मंडीदीप के वैकल्पिक रास्तों की तरफ डायवर्ट किया है, लेकिन इसके बावजूद होशंगाबाद रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन ने रास्ते में आने वाले कई निजी और सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर छुट्टी घोषित कर दी, जबकि धरने पर बैठे किसानों ने सड़क पर ही भोजन पकाने की व्यवस्था शुरू कर दी।
इस बीच कानूनी मोर्चे पर भी इस व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। खाद वितरण की 'ई-विकास' प्रणाली को चुनौती देने वाली कृषि आदान विक्रेता संघ की याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए यह केंद्र सरकार का एक नीतिगत निर्णय है। हालांकि, सर्वर और तकनीकी दिक्कतों के चलते किसान इस ई-टोकन और डिजिटल वितरण प्रणाली का कड़ा विरोध कर रहे हैं। किसान नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा, जिससे प्रशासन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
