भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद- एक मौलाना जिसने मदरसों से निकलकर बना दिया IIT और UGC आज उसी पर खड़ा है आधुनिक भारत|
स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री और 'भारत रत्न' मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की आज पुण्यतिथि है। IIT और UGC जैसी संस्थाओं की नींव रखने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी के राष्ट्र-निर्माण में योगदान को जानें।

Bharat Ratna Maulana Abul Kalam Azad
आज 22 फरवरी 2026 को पूरा देश भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रकांड विद्वान और स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। एक ऐसे समय में जब देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, मौलाना आज़ाद के विचार और उनके द्वारा स्थापित की गई संस्थाएं आज भी भारत के भविष्य को संवार रही हैं।
शिक्षा जगत के क्रांतिकारी नायक
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक दूरद्रष्टा थे जिन्होंने यह समझ लिया था कि बिना आधुनिक शिक्षा के भारत विश्व गुरु नहीं बन सकता। 1947 में जब उन्होंने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला, तब देश के सामने साक्षरता की बड़ी चुनौती थी।
• संस्थाओं का निर्माण: आज भारत जिस तकनीकी और शैक्षणिक प्रगति पर गर्व करता है, उसकी नींव मौलाना आज़ाद ने ही रखी थी। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की कल्पना की और 1951 में पहले IIT (खड़गपुर) की स्थापना हुई।
• UGC की स्थापना: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और सामंजस्य बनाए रखने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का गठन किया।
• अकादमियों का गठन: कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और साहित्य अकादमी जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र-निर्माण
मौलाना आज़ाद बचपन से ही मेधावी थे और उन्होंने कम उम्र में ही पत्रकारिता के माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनके द्वारा शुरू किए गए 'अल-हिलाल' अखबार ने मुस्लिम समुदाय को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
• अहिंसा और एकता: वे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के पक्के समर्थक थे और उन्होंने जीवन भर हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया। 1923 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने।
• विभाजन का विरोध: मौलाना आज़ाद ने धर्म के आधार पर देश के बंटवारे का कड़ा विरोध किया था। उनका मानना था कि भारत की ताकत उसकी 'साझी विरासत' में निहित है।
भारत रत्न से सम्मान
राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए, भारत सरकार ने 1992 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।
मौलाना आज़ाद के मुख्य योगदान: एक नजर में
क्षेत्र | प्रमुख योगदान |
शिक्षा | IIT, UGC और IISc जैसे संस्थानों को सुदृढ़ बनाना। |
साहित्य | 'गुबार-ए-खातिर' और 'इंडिया विन्स फ्रीडम' जैसी महान रचनाएं। |
संस्कृति | भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्थापना। |
राजनीति | स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री (1947-1958)। |
आज के दौर में उनकी प्रासंगिकता
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अक्सर कहा करते थे कि, "शिक्षा का मुख्य उद्देश्य इंसान बनाना है।" आज जब हम नई शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से देश को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उनके द्वारा दिखाई गई समावेशी शिक्षा की राह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर, हम उनके उस सपने को दोहराते हैं जहाँ भारत का हर नागरिक शिक्षित हो और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सके। एक महान लेखक, क्रांतिकारी पत्रकार और आधुनिक शिक्षा के जनक को कोटि-कोटि नमन।

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