भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और देश के तमाम राज्य क्रिकेट संघों के प्रशासनिक ढांचे पर एक बार फिर बड़ा कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। नई दिल्ली में स्थित देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और सख्त रुख अपनाते हुए बीसीसीआई तथा सभी राज्य क्रिकेट संघों को औपचारिक नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी क्रिकेट निकायों से सीधा सवाल किया है कि आखिर उन्हें 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025' के दायरे में क्यों न लाया जाए। इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। इस उच्चस्तरीय पीठ ने बीसीसीआई से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों के वकील इस बात पर जरूरी निर्देश प्राप्त करें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा शर्तें और प्रशासनिक नियम इस नए लागू कानून से क्यों न संचालित किए जाएं।

बीसीसीआई और अदालत के बीच सुधारों से जुड़ा यह कानूनी मामला वर्ष 2014 से लगातार जारी है। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर विभिन्न पक्षों द्वारा नई अर्जियां और याचिकाएं दाखिल की जाती रही हैं। इससे पहले, देश के इस सबसे अमीर खेल निकाय में प्रशासनिक पारदर्शिता और सुधारों की सिफारिश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीजेआई न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया था। अदालत ने बोर्ड के पूरे ढांचे और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लोढ़ा समिति की तमाम सिफारिशों को स्वीकार भी किया था, जिसके बाद से लगातार भारतीय क्रिकेट प्रशासन में नियमों का पालन किया जा रहा है।

इससे पहले सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के संविधान में कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों की अनुमति दी थी। उस आदेश के अनुसार, कोई भी पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ और बीसीसीआई दोनों को मिलाकर लगातार 12 साल तक का कार्यकाल पूरा कर सकता है, जिसमें 6 साल राज्य संघ और 6 साल बीसीसीआई का कार्यकाल शामिल होता है। इस नियम के तहत कोई भी व्यक्ति राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर लगातार दो कार्यकाल यानी तीन-तीन साल पूरे कर सकता है, जिसके बाद ही तीन साल का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होता है।

अब यदि 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025' के प्रावधानों को पूरी तरह से बीसीसीआई पर लागू कर दिया जाता है, तो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारियों के कार्यकाल, चुनाव प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक नियमों में एक बार फिर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस नए कानून के लागू होने से भारतीय खेल प्रशासन की दिशा और दशा पूरी तरह बदल सकती है, जिस पर देश भर के खेल प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों की पैनी नजर टिकी हुई है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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