भारत को चुनौती? जल संधि खत्म होने से पहले बांग्लादेश का बड़ा दांव, पद्मा नदी पर बांध बनाने की तैयारी|
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 34,497 करोड़ टका की परियोजना को दी मंजूरी, गंगा जल संधि समाप्त होने से पहले बांग्लादेश का बड़ा कदम।

पद्मा नदी की पृष्ठभूमि में प्रेस वार्ता करते बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी|
ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से चला आ रहा जल विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। बांग्लादेश की नवनिर्वाचित सरकार ने पद्मा नदी (भारत में गंगा) पर एक विशाल बैराज निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति (ECNEC) की बैठक में इस परियोजना के पहले चरण पर मुहर लगाई गई। लगभग 34,497.25 करोड़ टका की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना सीधे तौर पर भारत के फरक्का बांध के प्रतिउत्तर के रूप में देखी जा रही है, जो दोनों देशों के बीच भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकती है.
बांग्लादेश सरकार का तर्क है कि इस बैराज का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर पानी का पर्याप्त भंडारण करना है। जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने स्पष्ट किया कि भारत के फरक्का बैराज के कारण बांग्लादेश की ओर होने वाले 'नकारात्मक प्रभावों' को कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था. उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा संधि की अवधि इस वर्ष दिसंबर में समाप्त हो रही है। इस संधि के अंत से ठीक पहले ढाका का यह रणनीतिक फैसला जल कूटनीति के पटल पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी विश्लेषण किया जा रहा है.
राजनीतिक और तकनीकी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या एक साझा नदी पर बिना पूर्व सहमति के बांध बनाना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुकूल है। हालांकि, बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए दावा किया है कि इस परियोजना का भारत से कोई सीधा संबंध नहीं है। उनके अनुसार, 54 साझा नदियों के विवाद एक अलग विषय हैं, जबकि पद्मा बैराज बांग्लादेश का अपना आंतरिक और हितकारी मामला है, जिसके लिए भारत से किसी भी प्रकार की चर्चा या अनुमति की आवश्यकता नहीं है.
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो फरक्का बैराज, जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में स्थित है, लंबे समय से बांग्लादेश के लिए चिंता का विषय रहा है। 1975 में चालू हुए इस 2,304 मीटर लंबे बैराज का उद्देश्य कोलकाता बंदरगाह को गाद से बचाने के लिए पानी को भागीरथी-हुगली की ओर मोड़ना था. अब बांग्लादेश का नया प्रोजेक्ट उसी गंगा (पद्मा) के प्रवाह को नियंत्रित करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश जल प्रबंधन पर एक साझा सर्वसम्मति पर नहीं पहुँचते, तो आने वाले समय में दक्षिण एशिया में 'वाटर वार' जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो न केवल पर्यावरण बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका को संकट में डाल देगी.

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
