भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय लिखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इन पांचों राज्यों की कुल 824 सीटों पर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला आज दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगा। चुनावी मैदान में उतरे दिग्गजों की साख दांव पर लगी है और पूरे देश की नजरें विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के नतीजों पर टिकी हैं, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। बीजेपी ने इस बार बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का पुरजोर दावा किया है, जबकि टीएमसी अपने तीसरे कार्यकाल के लिए आश्वस्त नजर आ रही है।

मतगणना की प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जा रही है, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज मतों का मिलान होगा। सुरक्षा की दृष्टि से निर्वाचन आयोग ने इस बार अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पांचों राज्यों में मतगणना केंद्रों को सुरक्षा बलों ने अपनी निगरानी में ले लिया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था को 'छावनी' का रूप दे दिया गया है। राज्य के 77 मतगणना केंद्रों पर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 कंपनियों को तैनात किया गया है, जबकि अतिरिक्त 500 कंपनियां राज्य के संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रही हैं। सुरक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह स्वयं बंगाल में मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

खुफिया इनपुट के आधार पर चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियां बंगाल में हिंसा की आशंका को लेकर अत्यधिक सतर्क हैं। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बख्तरबंद गाड़ियों से पेट्रोलिंग की जा रही है और मतगणना केंद्रों के पास बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है। पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने पहली बार 77 आईपीएस अधिकारियों को विशेष पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया है। साथ ही, वित्तीय अनियमितताओं पर नजर रखने के लिए 458 आयकर अधिकारियों को काउंटिंग ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दक्षिण 24 परगना जिले में सर्वाधिक 45 ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, जो चुनावी प्रक्रिया की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

पश्चिम बंगाल के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों में भी राजनीतिक हलचल तेज है। तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके गठबंधन और विपक्षी खेमे के बीच कड़ा मुकाबला है। इस बार अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रदर्शन पर सभी की निगाहें हैं। क्या विजय द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने वर्चस्व को तोड़ने में सफल होंगे, यह आज साफ हो जाएगा। वहीं, असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर 'हैट्रिक' लगाने की कोशिश में है। यदि कांग्रेस गठबंधन यहां विफल होता है, तो यह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

केरल और पुडुचेरी के नतीजे भी दूरगामी प्रभाव डालेंगे। केरल में यदि वामपंथी गठबंधन (LDF) चुनाव हारता है, तो यह देश के राजनीतिक मानचित्र से लेफ्ट की सत्ता का पूरी तरह से बाहर होना होगा, जो 73 वर्षों में पहली बार होगा। दूसरी ओर, पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए प्रयासरत है। आज के परिणाम न केवल इन पांच राज्यों की क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों के लिए भी एक मजबूत वैचारिक और राजनीतिक आधार तैयार करेंगे। महिला मतदाताओं और 'साइलेंट वोटर्स' की भूमिका इन चुनावों में निर्णायक साबित होने वाली है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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