उत्तरखंड के बाद क्या असम में भी लागु होगा UCC Bill ? जानें क्या है पूरी खबर
असम में UCC विधेयक 2026 पेश; बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का पंजीकरण अनिवार्य। उत्तराखंड-गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य बनेगा। विपक्ष का भारी विरोध जारी।

गुवाहाटी में असम विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 के प्रावधानों की घोषणा करते मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा।
Assam UCC Bill 2026 : देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच असम से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम देश का ऐसा तीसरा राज्य बनने की राह पर अग्रसर हो गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होने जा रही है। सोमवार, 25 मई 2026 को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य विधानसभा में आधिकारिक तौर पर यूसीसी विधेयक (असम समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026) पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री सरमा ने इस कदम की घोषणा पहले ही बुधवार, 13 मई को कर दी थी, जिस पर अमल करते हुए सरकार ने तय तारीख को सदन के पटल पर इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयक को रख दिया। मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में असम के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में इस विधेयक को पेश किया, जिसके बाद से ही राज्य की सियासत में गरमाहट आ गई है। इस ऐतिहासिक विधेयक पर आगामी 27 मई को सदन में विस्तृत चर्चा होना तय हुआ है।
इस विधेयक के मुख्य कानूनी प्रावधानों और उद्देश्यों को बेहद स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक के 'उद्देश्य और कारणों के विवरण' में स्पष्ट किया है कि इस कानून का प्राथमिक मकसद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवनसाथी (लिव-इन रिलेशनशिप) संबंधों से जुड़े कानूनों को समेकित, सुव्यवस्थित और सरल बनाना है। यह कानून समाज के सभी वर्गों के लिए इन पारिवारिक और सामाजिक विषयों पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा, जिससे सालों से चली आ रही विसंगतियों को दूर किया जा सके।
विधेयक के अंतर्गत कुछ बेहद कड़े और सुधारात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो राज्य के सामाजिक ताने-बाने को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। कानून के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध: राज्य में किसी भी व्यक्ति को एक से अधिक विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। बहुविवाह को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित करने की मांग इस बिल में की गई है।
- विवाह की न्यूनतम आयु का निर्धारण: कानूनी तौर पर विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण: पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत जोड़ों के लिए अपने संबंध का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा।
- अधिकारों की सुरक्षा: लिव-इन में रहने वाले साझेदारों और ऐसे संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों के अधिकारों को औपचारिक रूप से कानूनी मान्यता दी जाएगी ताकि उनके हितों की रक्षा की जा सके।
सरमा सरकार के इस बड़े कदम के बाद असम की विधानसभा में सियासी संग्राम भी छिड़ गया है। कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित तमाम प्रमुख विपक्षी दलों ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस संवेदनशील कानून को लागू करने में जल्दबाजी दिखा रही है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इतने बड़े कानून को अमलीजामा पहनाने से पहले समाज के सभी हितधारकों, धार्मिक संगठनों और जनजातीय समूहों के साथ व्यापक परामर्श और विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। विपक्ष के कड़े तेवरों को देखते हुए 27 मई को होने वाली बहस के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं।
इस विधेयक के पेश होने का राष्ट्रीय महत्व भी बेहद खास है। यदि यह विधेयक असम विधानसभा से पारित हो जाता है, तो असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन जाएगा जिसने अपने यहाँ यूसीसी विधेयक पारित किया है। गौरतलब है कि साल 2024 में उत्तराखंड इस तरह का कानून लाने वाला देश का पहला राज्य बना था, जिसके बाद इसी वर्ष मार्च में गुजरात ने भी इसे अपनी विधानसभा से पारित कर इतिहास रचा था। अब असम भी इसी कतार में शामिल होने जा रहा है, जो देश में 'एक देश, एक कानून' की दिशा में बढ़ते कदमों का एक बड़ा संकेत है। इस कानून के दूरगामी परिणाम न सिर्फ असम की सामाजिक व्यवस्था बल्कि देश की भावी राजनीति पर भी देखने को मिलेंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
