Assam Police raid at Pawan Khera Delhi residence : असम में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए पासपोर्ट संबंधी आरोपों के बाद कानूनी और सियासी लड़ाई अब दिल्ली की दहलीज तक पहुँच गई है। मंगलवार को असम पुलिस की एक विशेष टीम पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर छापेमारी करने पहुंची। हालांकि, तलाशी के दौरान कांग्रेस नेता घर पर मौजूद नहीं मिले, जिसके बाद पुलिस टीम उनके परिसर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान जब्त करके रवाना हो गई। पुलिस अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि वे पवन खेड़ा को 'कहीं से भी ढूंढ निकालेंगे', जिससे आने वाले दिनों में उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया है कि पवन खेड़ा कानूनी कार्रवाई के डर से भाग रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, खेड़ा बीते दिन गुवाहाटी से रवाना हुए थे और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वे अब हैदराबाद की ओर निकल गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून अपनी गति से काम करेगा और किसी भी आरोपी को रियायत नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने इस छापेमारी को सीधे तौर पर 'प्रतिशोध की राजनीति' करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बुनियादी सवाल पूछने पर पुलिस की पूरी फौज तैनात करना यह दर्शाता है कि असम के मुख्यमंत्री पूरी तरह हताश और डरे हुए हैं। उन्होंने इसे विपक्षी आवाज़ को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग बताया।

विवाद की जड़ें 5 अप्रैल को पवन खेड़ा द्वारा की गई उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में हैं, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट होने का दावा किया था। खेड़ा ने सवाल उठाया था कि भारत के कानून के तहत दोहरी नागरिकता प्रतिबंधित होने के बावजूद एक मुख्यमंत्री की पत्नी के पास मुस्लिम देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले की एसआईटी जांच कराने की मांग करते हुए पूछा था कि क्या सरकार को इन पासपोर्टों की जानकारी थी। इन गंभीर आरोपों ने न केवल असम की राजनीति में उबाल ला दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा और नागरिकता कानूनों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।



वर्तमान स्थिति यह है कि असम पुलिस पवन खेड़ा की तलाश में छापेमारी तेज कर चुकी है, जबकि कांग्रेस इस मामले को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। यह कानूनी टकराव अब केवल पासपोर्ट के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए एक मुख्य चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए सामान की जांच और पवन खेड़ा की संभावित गिरफ्तारी इस मामले में अगला बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अंततः, यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास और चुनावी समर में जांच एजेंसियों की भूमिका पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है, जिसका प्रभाव असम के आगामी जनादेश पर पड़ना निश्चित है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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