असम की राजनीतिक किस्मत का फैसला करने के लिए आज प्रदेश की जनता लोकतंत्र के महापर्व में अपनी आहुति दे रही है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि पूर्वोत्तर का यह राज्य अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को लेकर कितना सजग है। चुनावी प्रक्रिया के शुरुआती दो घंटों के भीतर ही असम ने मतदान प्रतिशत के मामले में केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए एक नई इबारत लिख दी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे तक असम में लगभग 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।

मतदान केंद्रों का दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं है। ब्रह्मपुत्र की लहरों की तरह ही मतदाताओं का सैलाब भी उमड़ रहा है। इस बार के चुनाव में सबसे विशिष्ट बात महिलाओं और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं (फर्स्ट टाइम वोटर्स) का अभूतपूर्व जोश है। गुलाबी रंग से सजे विशेष महिला मतदान केंद्रों पर सुबह 6 बजे से ही महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शा रही है कि राज्य की नीतियां और भविष्य तय करने में उनकी भूमिका कितनी निर्णायक होने वाली है। वहीं, 18-19 वर्ष के युवा, जिनके हाथों में पहली बार मतदाता पहचान पत्र आया है, अपनी उंगली पर लगी स्याही को गौरव के साथ प्रदर्शित कर रहे हैं। इन युवाओं के लिए यह केवल एक वोट नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का एक माध्यम है।

प्रशासनिक स्तर पर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के लिए हर सेक्टर में 'इंजीनियर ऑन कॉल' की सुविधा दी गई है ताकि ईवीएम या वीवीपैट मशीनों में खराबी आने पर उन्हें तत्काल बदला जा सके। आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए उड़न दस्ते और निगरानी टीमें लगातार सक्रिय हैं। कानूनी तौर पर, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने इस बार वेबकास्टिंग की सुविधा का विस्तार किया है, जिससे सीधे दिल्ली और गुवाहाटी स्थित नियंत्रण कक्षों से बूथों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

जैसे-जैसे सूरज चढ़ रहा है, मतदान की गति और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि असम में मतदान का यह उच्च स्तर सत्ता विरोधी लहर या फिर मौजूदा सरकार के पक्ष में भारी गोलबंदी, दोनों में से किसी भी ओर इशारा कर सकता है। हालांकि, अंतिम परिणाम तो भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन मतदान के इन शुरुआती रुझानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि असम की जनता अपनी समस्याओं और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक है। केरल और पुडुचेरी जैसे साक्षरता में अग्रणी राज्यों से आगे निकलना असम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो यह साबित करता है कि पूर्वोत्तर भारत अब देश की मुख्यधारा की राजनीति में न केवल शामिल है, बल्कि नेतृत्व भी कर रहा है। आज का यह मतदान केवल एक सरकार का चयन नहीं है, बल्कि असम के आने वाले पांच वर्षों के सामाजिक और आर्थिक रोडमैप की नींव है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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