अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य के विभिन्न जिलों में आई अचानक बाढ़ और भीषण भूस्खलन के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक प्रभाव चीन सीमा से सटे इलाकों में देखने को मिला है, जहां कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं। प्रमुख पर्यटन स्थल और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मेचुका का सड़क संपर्क भी भारी भूस्खलन के कारण बंद हो गया है, जिससे वहां की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है।

आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुरंग कुमे जिले में मूसलाधार बारिश के चलते भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की एक अग्रिम चौकी बाढ़ की चपेट में आ गई थी। इस घटना के बाद वहां तैनात 19 जवानों का अपने बेस कैंप से संपर्क टूट गया था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि सभी जवान सुरक्षित पैदल चलकर बेस कैंप तक पहुंचने में सफल रहे और उनका स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है। बचाव और राहत अभियानों की निगरानी दामिन मुख्यालय के प्रशासन द्वारा की जा रही है।

इस आपदा में बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। क्रा दादी जिले में कुमे नदी पर बना 84 मीटर लंबा रणनीतिक पुल तेज बहाव में बह गया, जिसका उद्घाटन वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने किया था। इस पुल के टूटने से आठ गांवों का शेष राज्य से संपर्क कट गया है। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने पुल के आसपास के क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है और ढांचागत सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं।

राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक सात लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 29 लोग घायल हुए हैं। प्रभावित जिलों की संख्या 26 है, जहां के लगभग 425 गांव बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे हैं। इस आपदा से 97 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। सेना, आईटीबीपी, और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, दवाइयों और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के शीघ्र पुनर्निर्माण की मांग की है। भूस्खलन की पुनरावृत्ति के पीछे निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव को भी एक प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन वर्तमान में बचाव और राहत कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है ताकि सामान्य स्थिति को बहाल किया जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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