'विश्वगुरु' के दावों पर अनुराधा पौडवाल का बड़ा सवाल, 93 हजार स्कूल बंद होने पर सरकार को घेरा|
शिक्षा के गिरते स्तर और राम मंदिर दान चोरी पर अनुराधा पौडवाल ने सरकार को घेरा, दावों और हकीकत में अंतर बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल का प्रतीकात्मक चित्रण।
प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल ने अपने हालिया साक्षात्कार में भारत के 'विश्वगुरु' बनने के सरकारी दावों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई वर्षों के अंतराल के बाद सार्वजनिक चर्चा में लौटीं पद्म श्री सम्मानित गायिका ने देश की वर्तमान स्थिति, विशेषकर शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को विश्वगुरु बनाने के दावों और धरातल पर दिख रही स्थितियों के बीच बड़ा अंतर है। एक इंटरव्यू के दौरान शुभांकर मिश्रा से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 'विश्वगुरु' बनने के लिए जो आधार होना चाहिए, वह वर्तमान में कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
गायिका ने शिक्षा के क्षेत्र में आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए सरकार से सीधा सवाल किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ विश्वगुरु बनने की चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि देश में 93,000 स्कूल बंद हो गए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा के प्रसार और गुणवत्ता को प्राथमिकता दिए बिना ऐसे दावे बेमानी लगते हैं। अनुराधा पौडवाल ने आगे बढ़ते हुए राम मंदिर में हुई दान चोरी की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे मामलों से न केवल धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचती है, बल्कि यह देश की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों की एक सूची बनाई जानी चाहिए ताकि उन पर ठोस कार्रवाई की जा सके, बजाय इसके कि केवल बड़े-बड़े दावों पर चर्चा की जाए।
अनुराधा पौडवाल का करियर चार दशकों से अधिक का रहा है। उन्होंने हिंदी, मराठी, ओडिया और कई अन्य भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से नवाजा गया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित दर्जनों सम्मान हासिल किए हैं। उन्हें बॉलीवुड की 'भजन क्वीन' और 'मेलोडी क्वीन' के रूप में जाना जाता है। गायन की दुनिया में उनकी सफलता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इस बार उनका ध्यान अपने संगीत से हटकर देश के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे पर रहा।
अपने साक्षात्कार के दौरान अनुराधा ने अपनी निजी जिंदगी के दुखों को भी पहली बार सार्वजनिक रूप से साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बेटे आदित्य पौडवाल के निधन के अलावा, उन्होंने अपनी एक बेटी को भी खोया था, जिसका जन्म के मात्र 25 दिन बाद देहांत हो गया था। यह व्यक्तिगत क्षति उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक रही है। इसके अलावा, 12 सितंबर 2020 को किडनी फेल होने के कारण उनके बेटे आदित्य के असामयिक निधन ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया था। 2002 में मध्य प्रदेश में हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में बाल-बाल बचने के बाद से ही उन्होंने जीवन को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया था। आज अनुराधा पौडवाल द्वारा उठाए गए ये सवाल न केवल उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि देश की नीति और व्यवस्था पर चर्चा करने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण विचार बिंदु बन गए हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
