धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में एंटी पेपर लीक बिल और पुलिस कार्रवाई पर अमित शाह को घेरेगा विपक्ष|
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष संसद में पुलिस कार्रवाई और एंटी पेपर लीक बिल पर सरकार को घेरेगा।

संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं द्वारा पुलिस कार्रवाई और एंटी पेपर लीक बिल के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरे जाने की तैयारी के संदर्भ में|
संसद के मानसून सत्र का पहला हफ्ता भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया है, और आने वाले दिनों में यह गतिरोध और गहराने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नीट-यूजी परीक्षा लीक और देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों के मामलों पर सियासत गरमाई हुई है। हालांकि प्रदर्शनों की तीव्रता में कुछ कमी आई है, लेकिन विपक्ष पीछे हटने के बिल्कुल भी मूड में नहीं है। सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित 'पुलिस की बर्बरता' और जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की बड़ी तैयारी कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, सरकार इस सत्र के दौरान संसद में पेपर लीक के खिलाफ एक बेहद सख्त सजा वाला नया विधेयक पेश करने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है।
द वीक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) की प्रमुख पार्टियां जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा और अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के मुद्दे पर सदन में तत्काल चर्चा की पुरजोर मांग उठाएंगी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस पूरे मामले को 'गंभीर राष्ट्रीय महत्व' का करार देते हुए उस दिन सदन का तय कामकाज रोककर इस विषय पर विशेष चर्चा कराने के लिए पहले ही एक औपचारिक नोटिस दे दिया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह बेहद चिंता और घबराहट की बात है कि परीक्षा के पेपर में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा एजेंसियों की जानलेवा और गंभीर चोट पहुंचाने वाली कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आक्रामक अगुवाई में विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर दबाव को और अधिक बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने बेरहमी दिखाते हुए पैलेट गन का इस्तेमाल किया और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। इस गंभीर मामले को लेकर राहुल गांधी ने पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर उनकी सीधी जवाबदेही की मांग की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पत्र साझा करते हुए देश के सामने सीधा सवाल उठाया है कि आखिर इन मासूम छात्रों पर लाठीचार्ज और हमले करने का आदेश किसने दिया था?
यह पूरा विवाद 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरफ से आयोजित किए गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान भड़का था, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी बल का प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप कई छात्र और सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। राज्यसभा महासचिव को भेजे गए अपने नोटिस में टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने 'कार्य संचालन और कामकाज के नियमों' के नियम 267 का हवाला देते हुए सदन के निर्धारित कामकाज को स्थगित कर तुरंत चर्चा कराने की मांग की है। इसके साथ ही, माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी रविवार को कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि विपक्ष इस अमानवीय पुलिस कार्रवाई की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की जोरदार मांग करेगा। ब्रिटास ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि कुछ ही दिन पहले गृह मंत्री ने बयान दिया था कि सरकार उन युवाओं का पूरा सम्मान करती है जिन्होंने इन विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था, लेकिन पिछले 36 दिनों से वह सम्मान आखिर कहां गायब हो गया था। जब देश की राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर छात्रों की बेरहमी से पिटाई की जा रही थी और उनके सिर फोड़े जा रहे थे, तब वह सम्मान नजर क्यों नहीं आया। माकपा सांसद ने तर्क दिया कि यदि सरकार के उन बयानों में जरा भी सच्चाई है, तो जैसे धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है, वैसे ही गृह मंत्री अमित शाह को भी अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह इन बेगुनाह छात्रों पर हुए इस क्रूर हमले के लिए जिम्मेदार हैं।
राहुल गांधी ने रविवार को अमित शाह को लिखे अपने विस्तृत पत्र में छात्रों पर हुए इस 'बर्बर हमले' के लिए सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पुलिस की इस एकतरफा और हिंसक कार्रवाई के दौरान सैकड़ों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और सुरक्षाकर्मियों पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ जान-बूझकर मारपीट की है। राहुल गांधी ने पत्र में इस बात पर विशेष रूप से चिंता जताई कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान सुरक्षाबलों द्वारा जानलेवा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। मीडिया और सोशल मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है। राहुल गांधी ने बताया कि वे खुद 19 साल के घायल छात्र साहिल लोचब से मिलकर आए हैं जो इस समय असहनीय दर्द से गुजर रहा है और पैलेट गन लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
अपने पत्र में राहुल गांधी ने सीधे और तीखे सवाल पूछते हुए लिखा कि दिल्ली में तैनात तमाम सुरक्षा बल आखिरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय और आपके ही सीधे प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आते हैं, इसलिए मैं देश की ओर से यह पूछता हूं कि गृह मंत्री के तौर पर क्या आपने खुद छात्रों के खिलाफ पैलेट गन सहित ऐसे घातक बलों के इस्तेमाल की मंजूरी दी थी? और यदि आपने इसकी अनुमति नहीं दी थी, तो फिर यह आदेश आखिरकार किसने दिया था? उन्होंने यह भी सवाल किया कि सादे कपड़ों में हाथों में लाठियां लेकर छात्रों को बुरी तरह पीटते हुए नजर आए ये लोग कौन थे, क्या वे पुलिसकर्मी थे या फिर किसी संगठन के स्वयंसेवक? और यदि वे स्वयंसेवक या अन्य थे, तो उनकी इस तरह की तैनाती को किसने अधिकृत किया था?
एक तरफ जहां विपक्ष इन गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से इस संकट से निपटने के लिए विधाई कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार संसद के इसी सत्र के दौरान पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम कसने के लिए एक बेहद सख्त नया विधेयक पेश करने जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला विधेयक पेश करेंगे। 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024' में संशोधन करके इस नए और कड़े विधेयक को सदन में लाया जा रहा है। इस प्रस्तावित संशोधित विधेयक में पेपर लीक और नकल जैसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों के लिए 10 साल तक की लंबी जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का कड़ा प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, सरकार ने इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पहले ही एक विशेष टास्क फोर्स का भी गठन किया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने के पूरे आसार हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
