आधे घंटे के भीतर दो बड़ी कंपनियों ने बढ़ाए दाम, आज से नई दरों पर मिलेगा अमूल और मदर डेयरी का दूध।
परिचालन लागत और पशु आहार की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों ने लिया फैसला, नई दरें प्रभावी।

अमूल और मदर डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बाद एक रिटेल आउटलेट पर ग्राहकों की भीड़।
देश की दो सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों, अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, दोनों कंपनियों ने अपने दूध के विभिन्न वेरिएंट्स के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। नई दरें गुरुवार, 14 मई 2026 से प्रभावी हो गई हैं। अमूल का संचालन करने वाले गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने स्पष्ट किया है कि दूध के प्रमुख पैक और वेरिएंट पर यह बढ़ोतरी लागू होगी।
कीमतों में इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण उत्पादन और परिचालन लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी को बताया गया है। फेडरेशन के अनुसार, पशु आहार (कैटल फीड), पैकेजिंग सामग्री और परिवहन के लिए ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण इनपुट कॉस्ट का दबाव काफी बढ़ गया है। अमूल ने बताया कि यह मूल्य वृद्धि कुल मिलाकर 2.5% से 3.5% के बीच है, जो पिछले एक साल में दूध उत्पादन की लागत में हुए इजाफे की तुलना में कम है। गौरतलब है कि अमूल ने मई 2025 के बाद पहली बार कीमतों में बदलाव किया है, जबकि मदर डेयरी ने इससे पहले अप्रैल 2025 में दाम बढ़ाए थे।
डेयरी उद्योग का यह मॉडल काफी व्यापक है, जो सीधे तौर पर लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ा है। उदाहरण के तौर पर, अमूल का सहकारिता मॉडल तीन स्तरों—डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी, डिस्ट्रिक्ट मिल्क यूनियन और स्टेट मिल्क फेडरेशन—पर कार्य करता है। इस व्यवस्था के तहत, गांवों के किसान अपनी स्थानीय सोसाइटी के सदस्य होते हैं और उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जिला यूनियन का प्रबंधन करते हैं। यह मॉडल सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई गई कीमत का एक बड़ा हिस्सा सीधे उत्पादक यानी किसान तक पहुंचे। वर्तमान में इस पूरी सप्लाई चेन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।
दूध के संकलन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और आधुनिक तकनीक पर आधारित है। अकेले गुजरात में 18,600 से अधिक मिल्क को-ऑपरेटिव सोसाइटीज हैं, जिनसे 36 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। हर सुबह किसान अपना दूध लेकर कलेक्शन सेंटर पर पहुँचते हैं, जहाँ ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए दूध की मात्रा और फैट कंटेंट की जाँच की जाती है। किसानों की आय सीधे तौर पर इन्हीं दो मानकों पर निर्भर करती है और डेटा को कंप्यूटर में सुरक्षित कर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है। इस पारदर्शी व्यवस्था के बावजूद, वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और इनपुट खर्चों ने अंततः खुदरा कीमतों को प्रभावित किया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
